कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के आंदोलन में अब अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब संगठन की कार्यशैली, नेतृत्व और राजनीतिक संबंधों से जुड़े सवालों में घिरता दिखाई दे रहा है। आंदोलन में करीब एक महीने तक सक्रिय रहे पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने CJP और उससे जुड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुद को प्रदर्शन से अलग कर लिया है।
वीरू भाई का आरोप है कि स्वयं को गैर-राजनीतिक संगठन बताने वाली CJP वास्तव में आम आदमी पार्टी की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आंदोलन के दौरान संगठन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हुई और छात्रों तथा सामान्य प्रदर्शनकारियों को बिना उचित रणनीति के जोखिम में डाल दिया गया।
एक महीने तक आंदोलन में रहे वीरू भाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीरू भाई करीब एक महीने पहले बिहार स्थित अपना घर छोड़कर दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन में शामिल होने आए थे। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्यों ने उन्हें प्रदर्शन से दूर रहने की सलाह दी थी। परिवार का कहना था कि संगठन केवल दिखावा कर रहा है, लेकिन वीरू भाई को उम्मीद थी कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए गंभीर संघर्ष कर रहा है।
वीरू भाई के मुताबिक, शुरुआत में आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को काफी उम्मीदें थीं। उन्हें लगता था कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेता भी प्रदर्शन का समर्थन करेंगे और संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े दिखाई देंगे।
केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह के नहीं पहुँचने पर सवाल
पूर्व प्रदर्शनकारी ने कहा कि आंदोलनकारियों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे AAP के बड़े नेता संसद मार्च में शामिल होंगे। हालांकि प्रदर्शन के दिन कोई बड़ा नेता मौके पर नहीं पहुँचा।
वीरू भाई ने सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी वास्तव में आंदोलन और प्रदर्शनकारियों की माँगों का समर्थन कर रही थी, तो फिर उसका कोई सांसद या प्रमुख नेता मार्च में शामिल क्यों नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को राजनीतिक समर्थन का भरोसा दिया गया, लेकिन तनावपूर्ण स्थिति के समय संगठन और उससे जुड़े नेता पीछे हट गए।
CJP नेतृत्व पर प्रदर्शनकारियों को गुमराह करने का आरोप
वीरू भाई ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और संगठन के अन्य प्रमुख चेहरों पर आंदोलनकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, पुलिस के साथ झड़प शुरू होने पर संगठन का कोई बड़ा नेता प्रदर्शनकारियों के आगे मौजूद नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्रों को सबसे आगे भेज दिया। कई युवा पहली बार किसी आंदोलन में भाग लेने पहुँचे थे, लेकिन उचित दिशा-निर्देश और जिम्मेदार नेतृत्व नहीं मिलने के कारण उन्हें पुलिस कार्रवाई और हिंसक झड़पों का सामना करना पड़ा।
वीरू भाई का कहना है कि नेतृत्व की कथित लापरवाही के कारण कई छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हालात तनावपूर्ण हो रहे थे, तब संगठन के प्रमुख नेता स्थिति को संभालने या प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए आगे क्यों नहीं आए।
संसद मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन क्यों?
पूर्व प्रदर्शनकारी ने बिना अनुमति संसद की तरफ मार्च करने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि ‘संसद चलो’ मार्च की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने रास्तों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की तैयारी भी कर रखी थी।
इसके बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने और बैरिकेड्स पार करने के लिए प्रेरित किया। वीरू भाई ने सवाल किया कि जब संगठन के नेताओं को आगे के खतरे और संभावित पुलिस कार्रवाई की जानकारी थी, तब सामान्य छात्रों, युवाओं और महिलाओं को आगे क्यों भेजा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस रणनीति के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई और आम प्रदर्शनकारियों को इसका सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा।
20 जुलाई के संसद मार्च के बाद बढ़ा विवाद
CJP से जुड़ा यह विवाद 20 जुलाई 2026 को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के बाद तेज हुआ। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई।
प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरों में बैरिकेडिंग के आसपास धक्का-मुक्की, पथराव, लाठीचार्ज और भगदड़ जैसी स्थिति दिखाई दी थी। हिंसा के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और पूरे घटनाक्रम की जाँच शुरू की।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए। इनमें 118 पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी शामिल बताए गए। पुलिस का कहना था कि भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
CJP की रणनीति और राजनीतिक संबंधों पर सवाल
वीरू भाई के आरोपों के बाद CJP की रणनीति, नेतृत्व और राजनीतिक निष्पक्षता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। संगठन खुद को गैर-राजनीतिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता रहा है, लेकिन पूर्व प्रदर्शनकारी के दावों ने आम आदमी पार्टी के साथ उसके कथित संबंधों को लेकर विवाद को बढ़ा दिया है।
अब यह देखना होगा कि CJP नेतृत्व इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या संगठन संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा तथा प्रदर्शनकारियों को कथित रूप से जोखिम में डालने के आरोपों का जवाब देता है।
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