केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं। सफदरजंग अस्पताल से जारी कथित हस्तलिखित संदेश में उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियाँ पूरी होने पर वह 20 जुलाई 2026 को अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।
वांगचुक को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर थी, लेकिन लगातार चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक बताई गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उन्हें अस्पताल ले जाने के सरकारी कदम में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।
अनशन समाप्त करने के लिए रखीं तीन शर्तें
सोनम वांगचुक ने 19 जुलाई को लिखे अपने संदेश में समर्थकों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि वह किन परिस्थितियों में अनशन समाप्त कर सकते हैं।
WHEN WILL I END THE FAST….!
Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances… pic.twitter.com/kaOGx2Nk4T
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
1. सरकार स्वीकार करे शिक्षा व्यवस्था की खामियाँ
पहली शर्त में वांगचुक ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के समय में सामने आई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे। ऐसा होने पर वह 20 जुलाई को अनशन समाप्त कर देंगे।
2. सांसद संसद में मुद्दे उठाने का दें भरोसा
दूसरी शर्त के अनुसार, यदि वह और आंदोलन से जुड़े लोग संसद तक पहुँचते हैं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में अनियमितता और छात्रों की समस्याओं को संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
3. सांसद अस्पताल आकर दें आश्वासन
तीसरी शर्त में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य या अन्य परिस्थितियों के कारण उनका संसद तक पहुँचना संभव न हो, तो अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल आकर शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने का आश्वासन दें। इस स्थिति में भी वह अनशन समाप्त कर सकते हैं।
अस्पताल में रखे जाने को बताया ‘अवैध हिरासत’
अपने कथित हस्तलिखित संदेश में वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में “अवैध हिरासत” जैसी परिस्थितियों में रखा गया है और उनकी आवाजाही तथा संवाद की स्वतंत्रता सीमित है।
हालाँकि दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उन्हें हिरासत में नहीं रखा गया है और स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल पहुँचाने का कदम उठाया गया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने अदालत में आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी अस्पताल के कमरे में मौजूद रहते हैं और निजी बातचीत सुनते हैं।
‘संसद चलो’ मार्च को नहीं मिली पुलिस की अनुमति
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और उसके समर्थकों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक ‘संसद चलो’ मार्च निकालने की घोषणा की है। दिल्ली पुलिस के अनुसार इस मार्च के लिए न तो अनुमति दी गई और न ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त की गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत मार्च या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली में धारा 163 लागू, सुरक्षा बढ़ाई गई
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन और प्रस्तावित मार्च को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इसके अंतर्गत बिना अनुमति जुलूस, प्रदर्शन और निर्धारित सीमा से बाहर लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई जा सकती है।
जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग, निगरानी व्यवस्था, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन तैनात किए गए हैं। पुलिस ने लोगों से प्रतिबंधित इलाकों से दूर रहने और यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
मेट्रो सेवाओं पर भी असर
सुरक्षा कारणों से 20 जुलाई को राजीव चौक और जनपथ सहित मध्य दिल्ली के कुछ प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से प्रभावित किए जाने की सूचना सामने आई है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक अपडेट देखने की सलाह दी गई है।
Service Update
Due to Security reason, Janpath, Rajiv Chowk, Patel Chowk, Central Secretariat and Seva Teerth metro stations have been closed till further instructions.
— Delhi Metro Rail Corporation (@OfficialDMRC) July 20, 2026
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा आंदोलन
प्रदर्शनकारी कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कमियों और छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
वहीं, पुलिस का कहना है कि संसद सत्र, संरक्षित व्यक्तियों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को देखते हुए किसी भी अनधिकृत मार्च की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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