26/11 मुंबई आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक तहव्वुर हुसैन राणा ने भारत में अपनी पहली पूछताछ के दौरान पाकिस्तान की गहरी भूमिका का खुलासा करते हुए लश्कर-ए-तैयबा, आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के साथ अपने संबंधों की पुष्टि की है। अमेरिका से लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अप्रैल 2025 में भारत प्रत्यर्पित किए गए राणा ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को दिए बयान में स्वीकार किया कि वह पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद अधिकारी रहा है और उसे खाड़ी युद्ध के दौरान गुप्त मिशन पर सऊदी अरब भेजा गया था।
राणा ने बताया कि वह 1986 में रावलपिंडी के आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद बतौर कैप्टन सेना में शामिल हुआ और सियाचिन, बहावलपुर, क्वेटा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहा। सियाचिन में तैनाती के दौरान उसे फेफड़ों की बीमारी (पल्मोनरी ईडेमा) हो गई, जिसके बाद अनुपस्थित रहने के कारण डिज़र्टर घोषित कर सेना से हटा दिया गया।

राणा ने स्वीकार किया कि उसका सह-साजिशकर्ता डेविड हेडली लश्कर के तीन ट्रेनिंग कैंप में शामिल हो चुका था और उसने बताया था कि लश्कर विचारधारा से ज्यादा एक जासूसी नेटवर्क की तरह काम करता है। राणा ने यह भी खुलासा किया कि वह 20-21 नवंबर 2008 को मुंबई में एक होटल में ठहरा था और हमले से कुछ दिन पहले दुबई होते हुए बीजिंग चला गया था।
राणा ने मुंबई में खोले गए ‘फर्स्ट इमिग्रेशन सेंटर’ को अपना विचार बताया और दावा किया कि यह हेडली का नहीं, बल्कि उसका प्लान था। इस ऑफिस के जरिए हमलों से पहले मुंबई की रेकी और जासूसी की गई। उसने यह भी माना कि वह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों जैसे साजिद मीर, अब्दुल रहमान पशा और पाकिस्तानी मेजर इकबाल को जानता है—जो सभी 26/11 की साजिश में शामिल थे।
राणा ने पूछताछ में बताया कि हेडली को भेजे गए पैसे व्यापारिक खर्चों के तौर पर दिखाए गए थे और मुंबई में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उससे पैसों की मांग की थी—जिसने बाद में शिवसेना कार्यालय की रेकी में भी हेडली की मदद की थी। हाल ही में यही व्यक्ति कोलकाता में एक TMC नेता के कार्यालय की रेकी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पूछताछ में ईमेल्स और वीज़ा फर्जीवाड़े पर राणा बचने की कोशिश करता दिखा, लेकिन अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार उसने हेडली को फर्जी दस्तावेजों के जरिये भारत भेजने में मदद की थी। राणा ने एक और संदिग्ध बशीर शेख का भी नाम लिया, जो कथित रूप से मुंबई एयरपोर्ट पर हेडली को रिसीव करने गया था और फिलहाल कनाडा में छिपा हुआ माना जा रहा है।
इस पूछताछ से स्पष्ट है कि राणा केवल सहायक नहीं बल्कि घटनाओं की योजना और संचालन का अहम हिस्सा था। उसके इन बयानों से न केवल पाकिस्तान की संलिप्तता उजागर हुई है, बल्कि 26/11 हमले में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के सीधे संबंध भी बेनकाब हुए हैं। भारतीय एजेंसियां अब राणा की आगे की हिरासत की मांग करने जा रही हैं ताकि उससे और भी सुराग हासिल किए जा सकें।