पाकिस्तान से लगती गुजरात की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गुजरात सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य के गृह विभाग और उपमुख्यमंत्री Harsh Sanghavi के मार्गदर्शन में गुजरात पुलिस के 8 वरिष्ठ IPS अधिकारी 11 और 12 जून को सीमा से सटे 16 गांवों का विशेष दौरा करेंगे।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होटल या सरकारी विश्राम गृहों में ठहरने के बजाय सीमावर्ती गांवों के स्थानीय नागरिकों के घरों में रात्रि विश्राम करेंगे। सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों, स्थानीय चुनौतियों और सुरक्षा जरूरतों को जमीनी स्तर पर समझना है।
सीमा सुरक्षा की जमीनी हकीकत जानेंगे अधिकारी
गुजरात सरकार की यह पहल केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा तंत्र की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करना है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान अधिकारी सीमावर्ती गांवों में रहकर स्थानीय लोगों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साथ ही सीमा क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
वाव-थराद, पाटन और कच्छ के गांवों को किया गया शामिल
इस विशेष अभियान के तहत बनासकांठा के वाव-थराद क्षेत्र, पाटन जिले और कच्छ के सीमावर्ती इलाकों को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 16 गांवों का चयन किया गया है, जहां वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग टीमों में जाकर निरीक्षण करेंगे और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करेंगे।
किन अधिकारियों को मिली कौन-सी जिम्मेदारी?
कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ IPS अधिकारियों को अलग-अलग गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- ADGP वबांग जमीर वाव-थराद क्षेत्र के असरगाम और राचेना गांवों का दौरा करेंगे।
- ADGP अजय कुमार चौधरी कच्छ (पूर्व) के शिरानीबांध और जटावाड़ा गांवों का निरीक्षण करेंगे।
- IGP बिपिन शंकरराव अहीर पाटन जिले के धोकवाड़ा और चारंका गांवों का दौरा करेंगे।
- इसके अलावा DIGP ए. एम. मुनिया, DIGP के. एन. डामोर, DIGP डॉ. लीना पाटिल, ACP आर. टी. सुसरा और DIGP सुधा एस. पांडे को भी विभिन्न सीमावर्ती गांवों में निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।
रात में होगी बॉर्डर पेट्रोलिंग की समीक्षा
दौरे के दौरान अधिकारी रात्रिकालीन बॉर्डर पेट्रोलिंग का निरीक्षण करेंगे और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा करेंगे।
सीमा क्षेत्रों में तैनात पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों से सीधे बातचीत कर उनकी चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझा जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में कार्यरत जवानों का मनोबल बढ़ाना भी है।
गांववालों के साथ होगा सीधा संवाद
इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकें और जनसंवाद भी आयोजित किए जाएंगे।
ग्रामीणों से सीमा सुरक्षा, अवैध गतिविधियों, तस्करी, संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय समस्याओं से संबंधित फीडबैक लिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सुरक्षा तंत्र के महत्वपूर्ण सहयोगी होते हैं और उनकी जानकारी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना सकती है।
सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर
हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों और सीमा पार गतिविधियों को देखते हुए गुजरात सरकार लगातार सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों का गांवों में रुककर जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करना सुरक्षा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। इससे प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
गुजरात सरकार की यह पहल सीमा सुरक्षा, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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