राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर वैश्विक स्तर पर संगठन की विचारधारा और गतिविधियों को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसी क्रम में RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 29 अगस्त से अमेरिका और कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वे न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में आयोजित होने वाले ‘Oneness Celebration’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे।
मैनहट्टन में होगा प्रमुख कार्यक्रम
29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में आयोजित ‘Oneness Celebration’ कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के प्रमुख आयोजनों में से एक माना जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. मोहन भागवत विश्वबंधुत्व, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और भारतीय जीवन मूल्यों पर अपने विचार साझा करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग, सामाजिक संगठन, सांस्कृतिक संस्थाएं और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवी शामिल होने की संभावना है।
Gen-Z युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति
RSS अपने शताब्दी वर्ष के दौरान विशेष रूप से Gen-Z और युवा पीढ़ी तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए देश और विदेश में कई नए कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। संगठन का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय युवाओं, छात्रों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद स्थापित करना और भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा करना है।
भारतीय समुदाय से होंगे कई संवाद कार्यक्रम
अमेरिका प्रवास के दौरान डॉ. मोहन भागवत भारतीय मूल के लोगों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इन कार्यक्रमों में संघ की भूमिका, समाज सेवा, सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था, भारतीय संस्कृति और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
पहली बार कनाडा का दौरा
अमेरिका यात्रा के बाद डॉ. मोहन भागवत कनाडा जाएंगे। यह उनका पहला कनाडा दौरा होगा। वहां भी भारतीय समुदाय और विभिन्न संगठनों के साथ कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसके अलावा उनके ब्रिटेन दौरे की भी संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
FCRA संशोधन के बीच बढ़ी चर्चा
डॉ. मोहन भागवत का यह विदेश दौरा ऐसे समय हो रहा है जब विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित बदलावों को लेकर देश में चर्चा जारी है। इसी वजह से इस यात्रा पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की विशेष नजर बनी हुई है। हालांकि, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य RSS के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक भारतीय समाज से संवाद बढ़ाना बताया जा रहा है।
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