जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने के बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoJK को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चौधरी मोहम्मद रमजान ने PoJK को कथित रूप से “अलग देश” बताते हुए कहा कि वहां के मामलों की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की है और भारत को उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर सहित राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
PoJK पर सांसद के बयान से बढ़ा विवाद
भारत सरकार का आधिकारिक रुख है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद की कथित टिप्पणी केंद्र सरकार के घोषित रुख से अलग दिखाई देती है।
चौधरी मोहम्मद रमजान का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार अनुच्छेद 370, राज्य का दर्जा और निर्वाचित सरकार के अधिकारों जैसे मुद्दों को लगातार उठा रही है। फिलहाल पार्टी की ओर से सांसद की टिप्पणी पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
सात साल बाद भी अनुच्छेद 370 पर सियासी टकराव
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को पुनर्गठित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए गए थे।
इस फैसले की सातवीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच एक बार फिर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदलावों को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत बताया, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी सहित कई स्थानीय दलों ने फैसले का विरोध दोहराया।
उमर अब्दुल्ला ने भी उठाए सवाल
अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 के फैसले से लगे घाव अभी पूरी तरह भरे नहीं हैं। उन्होंने संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि केंद्रशासित प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में निर्वाचित सरकार के पास कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार सीमित हैं, जिससे जवाबदेही और शासन के बीच असंतुलन पैदा होता है।
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तेज
नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि विधानसभा चुनाव और निर्वाचित सरकार की वापसी के बावजूद पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलने से सरकार के अधिकार सीमित बने हुए हैं। हाल के दिनों में राजनीतिक दलों, नागरिक समूहों और पूर्व अधिकारियों के मंचों ने भी जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई है।
PoJK के चुनावों पर विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख
इस बीच विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे कथित स्थानीय चुनावों को “पूरी तरह दिखावा” बताया है। मंत्रालय का कहना है कि इस प्रकार की चुनावी प्रक्रिया से पाकिस्तान के अवैध कब्जे की वास्तविकता नहीं बदलती।
विदेश मंत्रालय ने PoJK में कथित दमन, विरोध प्रदर्शनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान की गतिविधियों पर ध्यान देने और उसे जवाबदेह ठहराने की अपील की है।
अब पार्टी के जवाब पर नजर
चौधरी मोहम्मद रमजान की कथित टिप्पणी से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। विरोधी दल पार्टी नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग कर सकते हैं कि क्या वह सांसद के बयान से सहमत है या इसे उनका व्यक्तिगत मत मानती है।
PoJK, अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच यह बयान आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन सकता है।
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