गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCOE) और CID क्राइम ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी और आतंकी फंडिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। करीब 226 करोड़ रुपये के इस नेटवर्क का संबंध ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी, सोने की स्मगलिंग और आतंकी संगठनों तक फंडिंग से जुड़ा पाया गया है।
डार्क वेब से शुरू हुई जांच
इस पूरे रैकेट का खुलासा डार्क वेब की निगरानी के दौरान हुआ। ब्लॉकचेन एनालिसिस में एक भारतीय IP एड्रेस सामने आया, जो artemislabs.cc नाम की संदिग्ध वेबसाइट से जुड़ा था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस अहमदाबाद के दानिलिम्दा इलाके तक पहुंची, जहां से मोहसिन सादिक मुलानी का नाम सामने आया।
अहमदाबाद से चला इंटरनेशनल नेटवर्क
जांच में पता चला कि यह नेटवर्क अहमदाबाद, मुंबई, दुबई और लंदन तक फैला हुआ था। गिरोह एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनल और डार्क वेब प्लेटफॉर्म के जरिए ब्रिटेन में ड्रग्स सप्लाई करता था और पेमेंट क्रिप्टोकरेंसी में लेता था।
आतंकी संगठनों से कनेक्शन
जांच में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का संबंध गाजा के आतंकी संगठन हमास से जुड़े नेटवर्क से मिला। इसके अलावा यमन के हाउथी, ईरान के IRGC-QF और रूस के प्रतिबंधित क्रिप्टो एक्सचेंज Garantex से भी लिंक सामने आए।
मोनरो और हवाला से छिपाया ट्रांजैक्शन
गिरोह ने ट्रैकिंग से बचने के लिए Monero जैसी प्राइवेसी-आधारित क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया। पुलिस ने दो ऐसे वॉलेट जब्त किए, जिनमें 193 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन मिले। बाद में इस पैसे को हवाला और अंगड़िया नेटवर्क के जरिए नकदी में बदला जाता था।
साइबर फ्रॉड का पैसा भी शामिल
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल में दर्ज 935 से ज्यादा साइबर फ्रॉड मामलों से लिंक थे। यानी आम लोगों से ठगा गया पैसा भी इस नेटवर्क के जरिए आतंकी गतिविधियों तक पहुंचाया जा रहा था।
9 आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड दुबई में
अब तक पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अहमदाबाद, मुंबई और हरियाणा के आरोपी शामिल हैं। मुख्य आरोपी मोहम्मद जुबैर पोपटिया फिलहाल दुबई में बताया जा रहा है, जिसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पहले भी चलता था अंतरराष्ट्रीय लेनदेन
जांच में यह भी सामने आया कि 2016 से 2021 के बीच यह गिरोह वेस्टर्न यूनियन जैसी सेवाओं के जरिए 9 देशों से पैसे ट्रांसफर करता था। कोविड के बाद इस नेटवर्क ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अपने अवैध कारोबार को और तेजी से फैलाया।
पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़ी बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों को जब्त करने में जुटी हैं। आने वाले समय में और गिरफ्तारी होने की संभावना है।
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