गुजरात की राजनीति में गुरुवार को बड़ा फेरबदल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को छोड़कर राज्य सरकार के सभी मंत्रियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम आगामी कैबिनेट विस्तार की तैयारियों का हिस्सा है। कुल 16 मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है, और शुक्रवार दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर नए मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में किया जाएगा। यह फेरबदल गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने और सरकार में नए चेहरों को लाने की भाजपा की रणनीति के तहत किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस नई कैबिनेट में लगभग 20 से 23 सदस्य शामिल हो सकते हैं। इनमें से 5 वर्तमान मंत्रियों को दोबारा मौका मिलने की उम्मीद है, जबकि कई पुराने चेहरों का टिकट कट सकता है। वहीं, पार्टी 16 नए चेहरों को मंत्री बनाकर सरकार में नई ऊर्जा और संतुलन लाने की योजना बना रही है। इस बार दो महिला नेताओं को भी मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व को और बढ़ावा मिल सके।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सी.आर. पाटिल और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे, के साथ लंबी बैठक की थी। इस बैठक में न केवल कैबिनेट विस्तार बल्कि पार्टी संगठन में भी नए चेहरों को शामिल करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संकेत दिया था कि जो भी नए चेहरे शामिल किए जाएं, वे जनता से गहराई से जुड़े हों और अपनी भूमिका संभालने के तुरंत बाद गुजरात के लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं देकर ‘नई शुरुआत’ का संदेश दें।
गुजरात के कैबिनेट गठन से जुड़े नियमों के अनुसार, राज्य की 182 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 27 मंत्री हो सकते हैं — यानी कुल सदस्यों की संख्या का 15 प्रतिशत। अब तक भूपेंद्र पटेल सरकार में कुल 17 मंत्री थे, जिनमें 8 कैबिनेट मंत्री और 8 राज्य मंत्री शामिल थे। इस संरचना में अब बदलाव किया जाएगा ताकि जातीय, क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखकर संतुलित टीम बनाई जा सके।
गौरतलब है कि सीएम भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर 2022 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं, इसी महीने की शुरुआत में राज्य के उद्योग मंत्री जगदीश विश्वकर्मा को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जिन्होंने सी.आर. पाटिल की जगह ली। यह फेरबदल भी पार्टी के भीतर चल रही पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
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