वामपंथी उग्रवाद को बड़ा झटका देते हुए CPI(M) के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव, उर्फ ‘सोनू’, ने महाराष्ट्र के गढ़चिरोली पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में अपने 60 नक्सली साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, राव पर 6 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली और हिंसा में कमी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आत्मसमर्पण और शांति वार्ता की पहल
70 वर्षीय वेणुगोपाल राव, जो CPI(M) की सबसे ऊँची निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य रहा है, ने सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को आत्मसमर्पण किया और अगले दिन मंगलवार (14 अक्टूबर) को औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। इस दौरान उसने सरकार के साथ शांति वार्ता शुरू करने की इच्छा व्यक्त की।
राव ने सरकार से एक महीने का संघर्षविराम (सीजफायर) लागू करने की अपील की ताकि वह विभिन्न राज्यों और जेलों में बंद अपने साथियों से चर्चा कर सके। उसने कहा, “मैं हथियार छोड़ रहा हूँ और अब भारत के शोषितों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलनों के साथ काम करूँगा। हमने मार्च 2025 से सरकार से बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। इसके बजाय, अभियान तेज कर दिए गए।”
#WATCH गढ़चिरौली, महाराष्ट्र: नक्सल कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया। आज लगभग 60 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। pic.twitter.com/8OOED8eYha
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 15, 2025
उसने बताया कि उसका यह आत्मसमर्पण नक्सलवादी महासचिव बसवराजू द्वारा इस साल की शुरुआत में जारी शांति अपील के अनुरूप है। बसवराजू मई 2025 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। राव ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह सरकार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बातचीत करने को तैयार है।
सरकार की प्रतिक्रिया और नक्सलवाद में गिरावट
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि भारत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार की दोहरी नीति—आत्मसमर्पण को प्रोत्साहन और सख्त कार्रवाई जारी रखना—से अच्छे नतीजे मिले हैं। शाह ने कहा, “अब अधिक लोग हिंसा छोड़कर पुनर्वास का रास्ता चुन रहे हैं। जो हथियार छोड़ते हैं, उनके लिए रेड कार्पेट है, लेकिन निर्दोष जनजातियों को नक्सलवादी हिंसा से बचाना सरकार का कर्तव्य है।”
वेणुगोपाल राव का जीवन और पृष्ठभूमि
मल्लोजुला वेणुगोपाल राव का जन्म तेलंगाना के करीमनगर जिले के पेड्दापल्ली में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता मल्लोजुला वेंकटैय्या और माँ मधुरम्मा स्वतंत्रता सेनानी परिवार से थे। उनके बड़े भाई मल्लोजुला कोटेश्वर राव (किशनजी) पश्चिम बंगाल में 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए, जबकि छोटे भाई अंजन्ना एक मंदिर में पुजारी हैं।
कॉमर्स स्नातक वेणुगोपाल ने युवावस्था में ही घर छोड़ दिया और नक्सली आंदोलन में शामिल हो गया। उसने भूपति, सोनू, मास्टर, अभय जैसे नामों से काम किया और जल्दी ही संगठन में नेतृत्व की भूमिका तक पहुँच गया।
उसने दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (गढ़चिरोली) की कमान सँभाली और बाद में पश्चिमी घाट क्षेत्र (गोवा से केरल तक) में संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी ली। राव पोलित ब्यूरो और सेंट्रल मिलिट्री कमिशन दोनों का सदस्य रहा।
उसका यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की दिशा में एक नया अध्याय खोलने वाला कदम भी माना जा रहा है।