आंदोलन की शुरुआत और पृष्ठभूमि
ईरान में दिसंबर 2025 के आखिर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक गंभीर और देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक परेशानियों के खिलाफ थे—तेजी से बढ़ती महंगाई, ईरानी रियाल की लगातार गिरती कीमत और खाने-पीने की चीज़ों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम लोगों की कमर तोड़ दी। हालात से परेशान लोग सड़कों पर उतरे, लेकिन जल्द ही यह आंदोलन केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा।
सरकार और सुप्रीम लीडर के खिलाफ खुला विरोध
जैसे-जैसे प्रदर्शन फैले, लोगों का गुस्सा सीधे सत्ता के केंद्र पर जा टिका। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खुलकर नारेबाज़ी होने लगी। “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे तेहरान से लेकर छोटे-छोटे शहरों तक सुनाई दिए। यह विरोध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे ईरान में फैल गया।
ईरान में भयानक दमन: रिपोर्ट के मुताबिक खामेनेई शासन ने 16,500–18,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला, 3.3 लाख से ज्यादा घायल।
दो दिनों के नरसंहार में ज्यादातर युवा, बच्चे और गर्भवती महिलाएं शहीद।
IRGC ने सिर पर निशाना लगाया। तेहरान के एक अस्पताल में अकेले 7,000 आंखों की चोटें।… pic.twitter.com/EMRJbNbQhD
— One India News (@oneindianewscom) January 19, 2026
मौतों और हिंसा के भयावह आंकड़े
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कम से कम 16,500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। मारे गए लोगों में बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है, जिनकी उम्र 30 साल से कम थी। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने 3,090 मौतों की पुष्टि की है, जबकि अन्य एक्टिविस्ट समूहों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
सीधे सिर में गोली और मेडिकल रिपोर्ट्स
डॉक्टरों और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर मृतकों और घायलों को सिर, गर्दन या छाती में गोली मारी गई। ये गोलियां सैन्य स्तर के हथियारों से चलाई गई प्रतीत होती हैं। कई मामलों में सिर में सीधी गोली मारने की पुष्टि हुई है। हजारों लोगों की आंखों में गंभीर चोटें आईं, जिनमें से 700 से 1,000 लोगों की आंखें हमेशा के लिए चली गईं।
इलाज में बाधाएं और मानवीय संकट
कुछ मामलों में घायलों को अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक नहीं करने दिया गया, जिससे खून की कमी के कारण मौतें हुईं। घायलों की संख्या 3 लाख 30 हजार से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा 22 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। विरोध में बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मौजूदगी भी सामने आई है, जिसने हालात को और भयावह बना दिया है।
इंटरनेट ब्लैकआउट और सूचना का अंधेरा
सरकार ने बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे देश के भीतर और बाहर सही जानकारी पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी वजह से कई रिपोर्ट्स और आंकड़े केवल आंशिक रूप से ही सामने आ पा रहे हैं।
खामेनेई का बयान और विदेशी साजिश का आरोप
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माना कि हजारों लोग मारे गए हैं, जिनमें से कुछ को “क्रूर और असभ्य तरीके” से मौत दी गई। उन्होंने इसके लिए अमेरिका और इज़रायल को जिम्मेदार ठहराया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “अपराधी” कहा। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “अमेरिका के फुट सोल्जर” करार देते हुए इसे विदेशी ताकतों की साजिश बताया।
‘डिजिटल अंधेरे में नरसंहार’
जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता ने इस स्थिति को “डिजिटल अंधेरे में नरसंहार” बताया है। तेहरान के बड़े अस्पतालों के आंकड़ों पर आधारित उनकी रिपोर्ट के अनुसार, दमन की तीव्रता और सूचना पर रोक ने इस संकट को और भी गंभीर बना दिया है।
विरोध प्रदर्शन अभी भी ईरान के कई हिस्सों में जारी हैं, लेकिन इंटरनेट बंद होने और सख्त दमन के चलते जमीनी हालात की पूरी तस्वीर सामने आना मुश्किल बना हुआ है। देश एक अभूतपूर्व राजनीतिक और मानवीय संकट के दौर से गुजर रहा है।
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