राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में अतिक्रमण तथा कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशासन की ओर से जैसलमेर के नाचना और नोख तथा बाड़मेर के रामसर, सेड़वा सहित विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने कथित अनधिकृत ढाँचों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
इस अभियान के दौरान कुछ मस्जिदों, मदरसों और अन्य धार्मिक संरचनाओं को हटाए जाने या नोटिस जारी किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस ने कार्रवाई की निष्पक्षता और मंशा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए की जा रही कानूनी कार्रवाई बताया है।
क्या है राजस्थान का ‘ऑपरेशन क्लीन’?
प्रशासन के अनुसार ‘ऑपरेशन क्लीन’ का उद्देश्य भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण और बिना अनुमति किए गए निर्माणों को हटाना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए प्रशासन विभिन्न निर्माणों के दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक सीमा से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान की जा रही है। जिन भवनों के पास वैध भूमि दस्तावेज, निर्माण अनुमति या अन्य जरूरी स्वीकृतियाँ नहीं हैं, उनके खिलाफ नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मस्जिदों और मदरसों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। प्रशासन और भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि निर्माण की वैधानिक स्थिति और सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है।
राजस्थान के साथ लगी पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के जिलों में आजादी के बाद से ही माहौल हमेशा सौहार्दपूर्ण रहा है। देशभर में चाहे कैसा भी सांप्रदायिक माहौल रहा हो पर संभवतः यहां कभी आपसी तनाव भी पैदा नहीं हुआ।
यहां हिन्दू और मुस्लिम धर्मस्थल एक ही श्रेणी में हैं और दोनों…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 20, 2026
बाड़मेर और जैसलमेर में कई स्थानों पर कार्रवाई
ऑपरेशन क्लीन के तहत जैसलमेर जिले के नाचना, नोख और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बाड़मेर जिले के रामसर, सेड़वा और सीमाई तहसीलों में भी प्रशासन द्वारा भूमि रिकॉर्ड तथा भवनों की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन मदरसों और मस्जिदों को ध्वस्त किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा कई धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस दिए जाने का भी दावा किया गया है।
कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने धार्मिक स्थलों, वक्फ संपत्तियों और वर्षों से उपयोग में लाई जा रही इमारतों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी निर्माण को हटाने से पहले संबंधित पक्ष को पर्याप्त समय और अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
कैलाश चौधरी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक हुए बड़े निर्माणों के उद्देश्य और उनके लिए उपलब्ध कराए गए धन के स्रोत पर सवाल उठाए।
कैलाश चौधरी ने कहा कि जिस सीमावर्ती क्षेत्र में केवल 60 से 100 लोगों की आबादी रहती है, वहाँ कथित रूप से पांच से सात करोड़ रुपये की लागत से इतनी बड़ी मस्जिद क्यों बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान उस क्षेत्र तक विशेष सड़क भी बनाई गई थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर इतनी कम आबादी के लिए बड़े और महंगे निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी तथा वहाँ किस प्रकार की गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं।
यह कैलाश चौधरी का राजनीतिक दावा है। संबंधित निर्माण की वास्तविक लागत, धन के स्रोत और वहाँ होने वाली गतिविधियों की स्वतंत्र या आधिकारिक जांच से जुड़ा विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी बाकी है।
‘सरकारी जमीन पर कब्जा स्वीकार नहीं’
कैलाश चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास किसी भी प्रकार का कथित अवैध निर्माण, सरकारी भूमि पर कब्जा या नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार सीमा क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक निर्माण की वैधानिकता और गतिविधियों की जांच आवश्यक है।
उन्होंने कांग्रेस पर इस कार्रवाई को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। चौधरी ने कहा कि जिन लोगों ने कोई अतिक्रमण नहीं किया और जिनके दस्तावेज वैध हैं, उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन सरकारी जमीन पर नियमों के विरुद्ध कब्जा या निर्माण किया गया है तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा।
भाजपा का कहना है कि यह अभियान किसी विशेष धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं है। पार्टी ने इसे सीमा सुरक्षा, सरकारी भूमि की रक्षा और अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाया जा रहा प्रशासनिक अभियान बताया है।
अशोक गहलोत ने सरकार पर साधा निशाना
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने ऑपरेशन क्लीन के तहत मस्जिदों तथा मदरसों के खिलाफ हो रही कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने केंद्र और राजस्थान सरकार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव तथा राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा करने का आरोप लगाया।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान से लगती भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के क्षेत्रों में आजादी के बाद से सांप्रदायिक सद्भाव बना रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में तनावपूर्ण परिस्थितियाँ बनने के बावजूद बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारा कायम रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों का सम्मान करते आए हैं। ऐसे में पुराने धार्मिक स्थलों और मदरसों पर चुनिंदा कार्रवाई करने से सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
1965 और 1971 के युद्ध का किया उल्लेख
अशोक गहलोत ने सीमावर्ती निवासियों के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान क्षेत्र के सभी धर्मों तथा समुदायों के लोगों ने भारतीय सेना का सहयोग किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन धार्मिक स्थलों और मदरसों में से कुछ आजादी से पहले के बताए जा रहे हैं, उनके खिलाफ अब सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई की जा रही है। गहलोत ने यह दावा भी किया कि स्थानीय हिंदू समुदाय के कुछ लोग कथित एकतरफा कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि कार्रवाई से पहले प्रत्येक निर्माण के इतिहास, भूमि रिकॉर्ड, वक्फ दस्तावेज और स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की जाए।
हरीश चौधरी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने भी ऑपरेशन क्लीन की टाइमिंग तथा तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सीमा सुरक्षा की आड़ में धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।
हरीश चौधरी ने कहा कि यदि कोई निर्माण अवैध है तो उसके खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कार्रवाई केवल किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थलों तक सीमित दिखाई देती है तो प्रशासन को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और स्थानीय निवासियों से बातचीत करने की कोशिश भी की है। उन्होंने प्रशासन से पुराने धार्मिक स्थलों से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने और ध्वस्तीकरण से पहले निष्पक्ष सुनवाई कराने की मांग की है।
राजस्थान वक्फ बोर्ड ने भी जताई चिंता
राजस्थान वक्फ बोर्ड ने मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। बोर्ड ने मस्जिद समितियों से संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराने, कानूनी सलाहकारों को प्रबंधन समिति में शामिल करने और सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाने की अपील की है।
वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर वैध दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद धार्मिक स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया है कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या धार्मिक स्थलों को चुनकर निशाना बनाया जा रहा है?
ऑपरेशन क्लीन को लेकर सबसे बड़ा विवाद इस सवाल पर है कि क्या प्रशासन केवल अवैध अतिक्रमण हटा रहा है या किसी विशेष समुदाय के धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस का दावा है कि मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ असमान रूप से कार्रवाई की जा रही है। वहीं भाजपा तथा प्रशासन का पक्ष है कि धार्मिक पहचान से अलग केवल अवैध निर्माण, सरकारी जमीन पर कब्जे और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील गतिविधियों की जांच की जा रही है।
इस विवाद में स्थिति तभी पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी जब प्रशासन कार्रवाई के दायरे में आए सभी निर्माणों की सूची, भूमि रिकॉर्ड, जारी किए गए नोटिस और ध्वस्तीकरण के कानूनी आधार सार्वजनिक करेगा।
पुराने धार्मिक स्थल को भी मिला नोटिस
रिपोर्टों के अनुसार जैसलमेर के रामगढ़ क्षेत्र में स्थित करीब 250 वर्ष पुराने बताए जा रहे एक धार्मिक स्थल को भी प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। इस स्थल के प्रति अलग-अलग समुदायों के लोगों की आस्था होने का दावा किया गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने पुराने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को लेकर अलग नीति अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों पुराने ढाँचों पर कार्रवाई करने से पहले उनके ऐतिहासिक, सामाजिक और कानूनी पक्ष की विस्तृत जांच की जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने संतुलन की चुनौती
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, बिना अनुमति निर्माण या संदिग्ध गतिविधियाँ सामने आने पर प्रशासन के लिए कार्रवाई करना जरूरी है।
दूसरी ओर, धार्मिक स्थलों और स्थानीय समुदायों की भावनाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शी तथा निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। कार्रवाई से पहले नोटिस, दस्तावेजों की जांच, सुनवाई का अवसर और स्पष्ट कानूनी आदेश उपलब्ध कराना विवाद को कम कर सकता है।
ऑपरेशन क्लीन अब केवल प्रशासनिक अभियान नहीं रह गया है। यह राजस्थान की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, सरकारी भूमि और सांप्रदायिक सद्भाव से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में बाड़मेर और जैसलमेर के अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी निर्माणों तथा भूमि रिकॉर्ड की जांच जारी रहने की संभावना है। कांग्रेस ने कार्रवाई के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि भाजपा ने कहा है कि अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान नहीं रुकेगा।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राजस्थान सरकार विवादित कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट जारी करती है या नहीं। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन सभी धर्मों और समुदायों से जुड़े अवैध निर्माणों पर समान नियम लागू करने का प्रमाण किस प्रकार प्रस्तुत करता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel