प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सूरत स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SVNIT) में कार्यरत सिक्योरिटी गार्ड जितेंद्र सिंह राठौर को गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया है। यह न्योता उनके उस असाधारण प्रयास के लिए दिया गया है, जिसके तहत वे बीते 26 वर्षों से देश के शहीद जवानों की यादों को सहेजते आ रहे हैं।
राजस्थान के भरतपुर जिले के निवासी जितेंद्र सिंह राठौर ने आर्मी, BSF, CRPF और असम राइफल्स समेत विभिन्न सुरक्षा बलों के शहीदों से जुड़ी जानकारी एकत्र की है। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अब तक करीब 2.7 लाख से अधिक शहीद सैनिकों से जुड़ी स्मृतियों को संजोकर रखा है। उनके संग्रह में 24 हजार से ज्यादा शहीदों की तस्वीरें और सैकड़ों प्रतिमाएं शामिल हैं। जितेंद्र इन सभी यादों को संरक्षित करने के लिए एक ‘शहीदों का हॉल’ बनाने की योजना भी तैयार कर रहे हैं।
सूरत के साधारण सिक्योरिटी गार्ड जितेंद्र सिंह, जिनके पास 23,400 शहीद जवानों की तस्वीरों का अनमोल संग्रह है, ने देशभक्ति का नया आयाम दिया।
PMO द्वारा गणतंत्र दिवस 2026 के लिए दिल्ली आमंत्रित किए जाने पर उनकी सादगी भरी प्रतिक्रिया—"मेरी जेब में सिर्फ 102 रुपये हैं, मैं नहीं आ… pic.twitter.com/hNbC218OBq
— One India News (@oneindianewscom) January 27, 2026
जितेंद्र के इस समर्पण की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। पीएम मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनके प्रयासों का जिक्र करते हुए उनकी तारीफ की थी। अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।
PMO और जितेंद्र सिंह के बीच हुई बातचीत भी सामने आई है। PMO की ओर से जब उन्हें दिल्ली आने का न्योता दिया गया, तो जितेंद्र ने विनम्रता से जवाब दिया कि उनके बैंक खाते में केवल 102 रुपये हैं, इसलिए वे यात्रा करने में असमर्थ हैं। इस पर PMO ने आश्वस्त किया कि उनके आने-जाने की पूरी व्यवस्था प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा।
बातचीत के दौरान जितेंद्र ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी ने कभी हवाई यात्रा नहीं की है और उन्होंने पत्नी को भी साथ लाने की अनुमति मांगी। इसके जवाब में PMO ने न सिर्फ़ अनुमति दी, बल्कि जितेंद्र और उनकी पत्नी दोनों के आने-जाने के फ्लाइट टिकट बुक करवा दिए।
देश के शहीदों की यादों को सहेजने वाले एक साधारण सिक्योरिटी गार्ड को मिला यह सम्मान न केवल उनके समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राष्ट्र सेवा के प्रति सच्ची भावना को सरकार किस तरह पहचान और सम्मान देती है।
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