मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के कारण प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समय-सारणी के अनुसार हिंदू और मुस्लिम समुदाय अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कर रहे हैं। किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पूरे इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
छावनी में तब्दील इलाका, ड्रोन और CCTV से निगरानी
भोजशाला परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों को भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ छावनी में बदल दिया गया है। ड्रोन और CCTV कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का मुख्य फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोनों समुदायों के कार्यक्रमों को बिना टकराव के संपन्न कराना है।
#WATCH | धार, मध्य प्रदेश | हिंदू संगठनों द्वारा निकाली गई शोभायात्रा भोजशाला पहुंची, जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम दोनों द्वारा पूजा-अर्चना की जा रही है।
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— One India News (@oneindianewscom) January 23, 2026
हिंदू पक्ष का बसंतोत्सव, शोभायात्रा और पूजा-अर्चना
हिंदू संगठनों की ओर से धार के लालबाग से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो गाजे-बाजे और डीजे के साथ भोजशाला पहुँची। बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाथों में भगवा ध्वज लेकर ‘खाली कर दो रास्ते, भोजशाला के वास्ते’ जैसे नारे लगाते नजर आए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई है। श्रद्धालु माँ वाग्देवी के तैल चित्र के साथ परिसर में प्रवेश कर रहे हैं। भारी भीड़ के कारण कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया।
जुमे की नमाज के लिए तय समय और अलग व्यवस्थाएँ
शुक्रवार होने के कारण मुस्लिम समुदाय के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक जुमे की नमाज अदा की जा रही है। प्रशासन ने पहले ही नमाजियों की सूची प्राप्त कर ली थी और प्रवेश व निकास के लिए अलग-अलग द्वार सुनिश्चित किए गए हैं। नमाज के दौरान सुरक्षा घेरा और अधिक कड़ा कर दिया जाता है ताकि दोनों समुदायों की धार्मिक गतिविधियों के बीच किसी प्रकार का व्यवधान न हो।
8,000 जवान, खुफिया एजेंसियाँ सतर्क
संभावित तनाव या किसी भी तरह की कट्टरपंथी गतिविधि को रोकने के लिए पुलिस, RAF और CRPF के लगभग 8,000 जवान तैनात किए गए हैं। पूरे इलाके में 200 से अधिक CCTV कैमरे और 10 आधुनिक ड्रोन निगरानी में लगाए गए हैं। खुफिया विभाग भी सक्रिय है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की प्राथमिकता टकराव रोकना और यथास्थिति बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और आगे की कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि एएसआई की सीलबंद रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। दोनों पक्षों को इस रिपोर्ट पर आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। जब तक हाई कोर्ट की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश लागू रहेगा। इस कानूनी पहल को विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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