हर साल अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश विसर्जन के साथ भगवान गणेश का महापर्व गणेश चतुर्थी समाप्त होता है। इस दिन भक्त बड़ी धूमधाम और श्रद्धा से बप्पा को विदाई देते हैं और मूर्तियों का विधिवत विसर्जन करते हैं। अंतिम दिन होने वाली पूजा को उत्तर पूजा कहा जाता है। परंपरा और मान्यता के अनुसार, इसी दिन गणेश जी अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत लौट जाते हैं।
गणेश चतुर्थी की शुरुआत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को होती है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है और पूरे भारत में भक्त इसे घर, ऑफिस और पंडालों में बड़े उत्साह से मनाते हैं। इतिहास बताता है कि सातवाहन, राष्ट्रकूट और चालुक्य राजवंशों के समय से ही इस उत्सव की परंपरा रही है। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत की थी ताकि समाज में एकता और देशभक्ति की भावना मजबूत हो सके।
महाभारत काल से भी गणेश विसर्जन का संबंध जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखवाने के लिए गणेश जी को लेखक बनाया। वेदव्यास लगातार दस दिन तक कथा सुनाते रहे और गणेश जी ने बिना रुके उसे लिखा। दस दिन बाद उनका शरीर बहुत गर्म हो गया, तब वेदव्यास ने उन्हें जलकुंड में स्नान कराया जिससे उनका ताप शांत हुआ। इसी घटना से गणेश स्थापना और विसर्जन की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।
विसर्जन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। यह जीवन की नश्वरता और प्रकृति में हर चीज के विलय होने का संदेश देता है। साथ ही, विसर्जन में प्रयुक्त हल्दी, दूर्वा, चंदन और फूल जैसी वस्तुएँ जल को शुद्ध करती हैं। हल्दी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण बारिश के मौसम में तालाबों और नदियों को स्वच्छ रखने में सहायक होते हैं।
आज अनंत चतुर्दशी के मौके पर पूरे देश में गणेश विसर्जन हो रहा है। मुंबई में इस अवसर पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। इस साल यहाँ लगभग 1.80 लाख मूर्तियों का विसर्जन होना है, जिनमें 6,500 सार्वजनिक पंडालों और करीब 1.75 लाख घरेलू मूर्तियाँ शामिल हैं। विसर्जन के लिए 205 कृत्रिम झीलों और अलग-अलग समुद्र तटों का उपयोग किया जाएगा।
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 21,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। खास बात यह है कि पहली बार मुंबई पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। गिरगांव चौपाटी पर AI कंट्रोल रूम बनाया गया है, बड़े पंडालों को QR कोड दिए गए हैं और जुलूस में शामिल वाहनों पर स्टिकर लगाए गए हैं। इससे पुलिस को ट्रैफिक और भीड़ को रियल टाइम में मैनेज करने में मदद मिल रही है।
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