मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार के नक्सल-मुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बालाघाट जिले में कान्हा–भोरमदेव (केबी) डिवीजन के 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इन माओवादियों ने एके-47 सहित आठ हथियार मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपे, और बदले में मुख्यमंत्री ने सभी को संविधान की प्रति प्रदान की। आत्मसमर्पण करने वालों में ₹77 लाख का इनामी माओवादी सुरेंद्र उर्फ कबीर भी शामिल है।
हॉक फोर्स यूनिट के कमांडेंट शियाज के.एम. ने बताया कि कबीर केबी डिवीजन की स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था, जबकि राकेश होदी डिवीजनल कमेटी में शामिल था। दोनों कान्हा नेशनल पार्क के भीतर सक्रिय थे और बीते एक वर्ष में सुरक्षाबलों के साथ कम से कम तीन मुठभेड़ों में शामिल रहे। कबीर का आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
"नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में मध्यप्रदेश की बड़ी सफलता"
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थित में बालाघाट में "पुनर्वास से पुनर्जीवन" कार्यक्रम के तहत 10 नक्सलियों (4 महिला सहित) ने आत्मसमर्पण किया।
नक्सलवाद-मुक्त मध्यप्रदेश के संकल्प की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण… pic.twitter.com/tzJy1awlpP
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) December 7, 2025
इंस्पेक्टर की हत्या के बाद तेज हुआ अभियान
माओवादियों का यह आत्मसमर्पण सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए सफल अभियानों का नतीजा है। ये अभियान हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की हत्या के बाद शुरू हुए थे। 32 वर्षीय शर्मा को दो वीरता पदक और एक आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन मिला था। वे छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र के त्रि-जंक्शन पर बोर तालाब इलाके में एक मुठभेड़ में शहीद हुए थे।
इस घटना के बाद हॉक फोर्स, मध्य प्रदेश पुलिस, महाराष्ट्र कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की। इस दबाव ने माओवादियों के भीतर भय पैदा किया और उनके प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमटते गए, जिसके परिणामस्वरूप एक बड़ा आत्मसमर्पण देखने को मिला।
बातचीत और भरोसे की प्रक्रिया ने बदला समीकरण
बालाघाट में माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण हॉक फोर्स की स्पेशल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा महीनों की शांत और सतत बातचीत का परिणाम था। शुरुआत में माओवादी एक भरोसेमंद वनरक्षक के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों तक पहुँचे। इसके बाद कई चरणों की बैकचैनल बातचीत हुई, जिसके बाद वे दो समूहों में कड़ी सुरक्षा में IG के सरकारी आवास पहुँचे।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “माओवादियों ने अपने सोर्स के जरिए वनरक्षक को संदेश भेजा, और उसी चैनल से बातचीत आगे बढ़ी।” पिछले महीने ही बड़े माओवादी विकास नागपुरे उर्फ नवज्योत ने आत्मसमर्पण किया था और साथियों से भी हथियार छोड़ने की अपील की थी, जिसने इस समूह के निर्णय को प्रभावित किया।
रिपोर्टों के अनुसार, माओवादी शुरू में छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करना चाहते थे क्योंकि उन्हें मध्य प्रदेश की एजेंसियों पर भरोसा कम था। हालांकि, हॉक फोर्स की इंटेलिजेंस टीम लगातार संपर्क में रही और उन्हें सुरक्षा तथा संरक्षण का भरोसा दिलाती रही। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि “मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी सुरक्षा की गारंटी दी है।”
केबी डिवीजन की लीडरशिप को बड़ा झटका
कबीर और राकेश होडी के आत्मसमर्पण से कान्हा–भोरमदेव (केबी) डिवीजन की लीडरशिप ढह गई है। दोनों माओवादी छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से हैं। कबीर, जो सुकमा का निवासी है, वर्ष 1995 में नक्सल आंदोलन से जुड़ा था और धीरे-धीरे संगठन की शीर्ष संरचना तक पहुँचा। वह वरिष्ठ माओवादी देवुजी का बॉडीगार्ड रह चुका है और दंडकारण्य क्षेत्र में ट्रेनर तथा दरबा डिवीजन में सैन्य प्रभारी भी रहा है। 2016 के बाद से वह केबी डिवीजन में स्पेशल MMC जोन का सचिव था।
राकेश होडी, जिसकी उम्र 42 साल है, वर्ष 2002 में नक्सलवाद से जुड़ा था। उसने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र में कई अभियानों को अंजाम दिया था। हाल ही में उसे केबी डिवीजन में सचिव पद पर पदोन्नत किया गया था। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों के सरेंडर से इस डिवीजन की संरचना लगभग ध्वस्त हो गई है।
नए जेनरेशन के माओवादियों का आत्मसमर्पण
बाकी आठ माओवादी मुख्य रूप से बीजापुर और सुकमा जिले के रहने वाले हैं और गोंड जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। इनकी उम्र 26 से 32 वर्ष के बीच है, इसलिए इन्हें माओवादियों की नई पीढ़ी माना जाता है।
इन आठ माओवादियों में समर उर्फ सामरू उर्फ राजू आत्राम, जरीना उर्फ जोगी मुसाक, नवीन हुप्पो उर्फ हिड़मा, सलीता उर्फ सावित्री अलावा, जयशीला उर्फ ललिता ओयम और शिल्पा हुप्पो शामिल हैं।
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