कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विवादित बयान देकर नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन को लेकर चव्हाण के दावों ने सियासी गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है।
पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चव्हाण ने दावा किया कि ऑपरेशन के पहले ही दिन भारत को बड़ा झटका लगा था। उनके अनुसार, 7 दिसंबर को हुई एक छोटी हवाई झड़प में कथित तौर पर भारत को नुकसान उठाना पड़ा, जिसके चलते भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के खतरे के कारण आगे की कार्रवाई रोकनी पड़ी।
ओप्रेसन सिंदूर में हम पहले दिन ही हार गए थे – पृथ्वीराज चह्वाण कांग्रेस ( भूतपूर्व cm महाराष्ट्र )
100%सत्य
चह्वाण साब बिल्कुल सही कह रहे है
वाकई में पाकिस्तान के साथ इधर के कांग्रेसी ओर समूची कांग्रेस भी पहले ही दिन हार गई थी
पाकिस्तान और कांग्रेस अलग कहा है, एक ही तो है भई… pic.twitter.com/VvH6Y3Fxpi
— Ocean Jain (@ocjain4) December 16, 2025
चव्हाण ने कहा, “पहले दिन हम पूरी तरह हार गए थे। आधे घंटे की हवाई लड़ाई में भारतीय एयरक्राफ्ट मार गिराए गए। लोग मानें या न मानें, लेकिन यही हुआ है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्वालियर, बठिंडा और सिरसा जैसे प्रमुख एयरबेस से किसी भी विमान ने उड़ान नहीं भरी, क्योंकि भारतीय जेट्स के मार गिराए जाने की आशंका बहुत अधिक थी और वायुसेना को व्यावहारिक रूप से ग्राउंड कर दिया गया था।
इन बयानों के सामने आते ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। बीजेपी ने चव्हाण पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे कॉन्ग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भाषा बोल रहे हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि इस तरह के बयान सेना का मनोबल कमजोर करते हैं और दुश्मन देश के प्रोपेगैंडा को बल देते हैं।
#WATCH | दिल्ली: भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर कहा, "…सेना का अपमान कांग्रेस की पहचान बन चुका है… ये केवल पृथ्वीराज चव्हाण का बयान नहीं है, ऐसे ही बयान राहुल गांधी ने भी दिए हैं। ये सारे बयान राहुल गांधी के हैं इसीलिए राहुल गांधी या… pic.twitter.com/Cro5NjUgve
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 17, 2025
चव्हाण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस पूरे अभियान में जमीनी स्तर पर कोई सैन्य हलचल नहीं हुई और यह केवल हवाई तथा मिसाइल हमलों तक सीमित रहा। उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य की लड़ाइयाँ भी इसी तरह लड़ी जाएँगी।
उन्होंने कहा, “पूरे ऑपरेशन के दौरान सेना की एक किलोमीटर की भी मूवमेंट नहीं हुई। दो-तीन दिनों में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह से हवाई और मिसाइल लड़ाई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमें वास्तव में 12 लाख सैनिकों वाली थलसेना की जरूरत है, या बलों की तैनाती पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्धों में आसमानी दबदबा निर्णायक भूमिका निभाएगा, इसलिए भारत के सैन्य ढांचे और फोर्स डिप्लॉयमेंट पर नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। चव्हाण ने भारतीय फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है, जबकि भारत सरकार ने इस तरह के सभी दावों को साफ तौर पर खारिज किया है।
सेना ने आधिकारिक रूप से कई बार कहा है कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सेना के मुताबिक, राफेल फाइटर जेट, SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों जैसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया।
सरकारी और सैन्य बयानों के बावजूद पृथ्वीराज चव्हाण के वक्तव्य ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर राजनीतिक बहस को फिर से हवा दे दी है। इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि विपक्षी नेता देश की सैन्य कार्रवाइयों को सार्वजनिक मंचों पर किस तरह पेश करें।
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