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‘डॉ. हेडगेवार आने वाली चुनौतियों को समझते थे’, RSS के 100 साल पूरे होने पर स्पेशल इंटरव्यू में बोले होसबाले

RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ की शताब्दी पर विक्रमा साप्ताहिक में दिए इंटरव्यू में संघ की स्थापना, शाखा व्यवस्था, डॉ. हेडगेवार की सोच, जाति से जुड़े मुद्दे, और हिंदुत्व पर विस्तृत चर्चा की।

Last updated: 2025/03/29 at 12:37 PM
One India News Team
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी कि RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर कर्नाटक की मशहूर साप्ताहिक पत्रिका विक्रमा को एक खास इंटरव्यू दिया है। यह इंटरव्यू युगादी के अवसर पर विक्रमा साप्ताहिक के विशेष संस्करण ‘संघ शतमान’ के लिए लिया गया, जिसमें संघ के 100 साल के सफर को दर्शाया गया है। करीब 2.5 घंटे तक चली इस गहन बातचीत में होसबाले ने विक्रमा के संपादक रमेश डोड्डापुरा से संघ की शुरुआत, समाज में इसके योगदान, मंदिर पुनरुद्धार, जाति जैसे मुद्दों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। हम आपको इस इंटरव्यू के कुछ मुख्य अंशों के बारे में बता रहे हैं।

Contents
1. शाखा की सफलता का रहस्य2. प्रचारक व्यवस्था की प्रेरणा और उत्पत्ति3. डॉ. हेडगेवार का व्यक्तित्व और सोच4. संघ में एकता और जाति पर दृष्टिकोण5. शताब्दी पर उत्सव की कोई योजना नहीं6. अखंड भारत और पंच परिवर्तन🔸 अखंड भारत की सोच:🔸 पंच परिवर्तन योजना:7. युवाओं और स्वयंसेवकों के लिए संदेश

1. शाखा की सफलता का रहस्य

दत्तात्रेय होसबाले ने शाखा को संघ की रीढ़ कहा। उन्होंने बताया कि:

  • शाखा का उद्देश्य: यह व्यक्तित्व निर्माण के लिए बनाई गई थी।

  • सार्वजनिक, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया: शाखा रोज़ाना एक घंटे सार्वजनिक जगहों पर होती है, इसमें कोई रहस्य नहीं है।

  • इसके लिए चाहिए:

    • रोज़ रोज़ आने की लगन

    • अनुशासन

    • बिना स्वार्थ के सेवा और त्याग की भावना

  • उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने शाखा जैसी चीजें शुरू करने की कोशिश की, लेकिन निस्वार्थ भाव के बिना वह सफल नहीं हुए।

  • उन्होंने संघ गीत की एक पंक्ति का ज़िक्र किया — “शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है” — यही शाखा की सफलता का आधार है।

2. प्रचारक व्यवस्था की प्रेरणा और उत्पत्ति

होसबाले जी ने बताया कि प्रचारक व्यवस्था की जड़ें भारतीय परंपरा में हैं:

  • भारत में साधु-संत, ऋषि-मुनि समाज और धर्म के लिए जीवन समर्पित करते आए हैं।

  • आज़ादी के आंदोलन के दौरान भी कई युवाओं ने निजी जीवन छोड़कर देश सेवा की।

  • डॉ. हेडगेवार इसी परंपरा से प्रेरित थे।

  • उन्होंने महाराष्ट्र के समर्थ रामदास द्वारा लाई गई ‘महंत’ परंपरा का उल्लेख किया, जो प्रचारक जीवन के क़रीब है।

  • प्रचारक वे लोग हैं जो संघ कार्य के लिए अपने जीवन का त्याग करते हैं, और पूरे देश में शाखा शुरू करते हैं।

3. डॉ. हेडगेवार का व्यक्तित्व और सोच

होसबाले जी ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को दूरदर्शी और सादगी पसंद बताया:

  • वे क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल रहे, लेकिन बाद में समाज निर्माण में जुट गए।

  • वे कभी अपनी प्रसिद्धि के पीछे नहीं भागे।

  • कोई जीवनी लिखने से मना कर दिया था, क्योंकि वे चाहते थे कि लोग संगठन को जानें, व्यक्ति को नहीं।

  • 1989 में उनकी जन्म शताब्दी के दौरान ही उनकी तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, उससे पहले लोग उनके चेहरे से अनजान थे।

4. संघ में एकता और जाति पर दृष्टिकोण

संघ के भीतर एकता के बारे में उन्होंने कहा:

  • संघ में गहरा भाईचारा और आपसी सम्मान है।

  • निर्णय लेने के बाद सभी स्वयंसेवक आज्ञा का पालन करते हैं, चाहे उनकी राय कुछ भी रही हो।

  • संघ में जाति का कोई स्थान नहीं है:

    • हर जाति, संप्रदाय, परंपरा के लोग स्वयंसेवक हैं।

    • संघ कार्यकर्ता जाति-आधारित संगठनों में सक्रिय नहीं होते।

    • संघ की पहली सीख: “हम सब हिंदू हैं”।
      जाति के मुद्दे को टकराव की बजाय हिंदू एकता से सुलझाने पर ज़ोर।

5. शताब्दी पर उत्सव की कोई योजना नहीं

संघ के शताब्दी वर्ष (2025) के बारे में:

  • डॉ. हेडगेवार नहीं चाहते थे कि संघ अपनी सालगिरह मनाए।

  • 25, 50, 75 वर्ष पूरे होने पर भी कोई आयोजन नहीं हुआ।

  • इस बार भी कोई बड़ा उत्सव नहीं होगा।

  • सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि यह समय आत्मचिंतन का है, जश्न का नहीं।

  • सवाल यह है कि “लक्ष्य अब तक क्यों पूरा नहीं हुआ?“

6. अखंड भारत और पंच परिवर्तन

🔸 अखंड भारत की सोच:

  • सिर्फ भौगोलिक एकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक एकता का विचार।

  • सबकी धार्मिक प्रथाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब एक हैं।

  • हिंदू समाज को मजबूत और संगठित करना ही इसका रास्ता है।

🔸 पंच परिवर्तन योजना:

RSS के पांच समाज जागरण अभियान, जिन्हें Hindutva के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू माना गया:

  1. कुटुंब प्रबोधन (परिवार में संवाद और संस्कार)

  2. स्वदेशी (स्वदेशी उत्पादों को अपनाना)

  3. परिसर संरक्षण (पर्यावरण और जल संरक्षण)

  4. सामाजिक समरसता (सभी जातियों और वर्गों के बीच समानता और भाईचारा)

  5. नागरिक शिष्टाचार (सड़क, समाज और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन और शिष्टाचार)

होसबाले ने कहा कि हिंदुत्व सिर्फ मंदिर, गाय या धारा 370 तक सीमित नहीं है। यह एक जीवन दृष्टि है, जो समय के साथ बदलती और समाज को सुधारती है।

7. युवाओं और स्वयंसेवकों के लिए संदेश

इंटरव्यू के अंत में उन्होंने कहा:

  • सभी को देश की गरिमा और समाज के उत्थान के लिए काम करना चाहिए।

  • अपने जीवन के कुछ समय को समाज के लिए समर्पित करें।

  • छोटे-मोटे मतभेदों को छोड़कर समाज की सकारात्मक शक्तियों को एकजुट करें।

  • भारत को दुनिया के लिए एक प्रेरणा और प्रकाश बनाना है।

यह इंटरव्यू संघ के 100 साल के अनुभव, उसके मूल्यों, सोच और भविष्य के रोडमैप को बहुत साफ़ और ईमानदारी से सामने रखता है।
यह स्पष्ट करता है कि RSS का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक, अनुशासित और एकजुट परिवर्तन लाना है।

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