गोधरा, गुजरात:
गोधरा की सेशंस कोर्ट ने 9 जुलाई 2024 के एक गौहत्या और गौमांस हेराफेरी मामले में दो लोगों महेबुब अब्दुल्ला सबुरिया और फरहान महेबुब सबुरिया (बाप-बेटे) को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोनों की जेल की अवधि दो साल और बढ़ाई जाएगी। वहीं, तीसरे आरोपित सलीम सिद्दीक को शक का फायदा देकर बरी कर दिया गया।
मामले का विवरण:
गोधरा बी डिविजन पुलिस स्टेशन के अधिकारी 9 जुलाई 2024 को रूटीन पेट्रोलिंग पर थे। तभी गोधरा-हमीपुर रोड पर अली मस्जिद के पास एक संदिग्ध वाहन दिखा। पुलिस ने वाहन रोककर जांच की तो दो लोग भागने लगे, जिन्हें पकड़ लिया गया। कार की तलाशी में 53 किलो गौमांस और कुछ हथियार बरामद हुए। पुलिस ने वेटरनरी डॉक्टर को बुलाकर मांस की जांच करवाई और FSL सूरत में सैंपल भेजा गया। रिपोर्ट में मांस गाय का पाया गया।
पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में तीन आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। महेबुब और फरहान को मौके से पकड़ा गया था, जबकि सलीम पर आरोप था कि उसने दोनों को गौमांस सप्लाई किया था। चार्जशीट 19 नवंबर 2024 को दाखिल की गई, चार्ज फ्रेम 20 फरवरी 2025, और 2 फरवरी 2026 को फैसला सुनाया गया।
कोर्ट की टिप्पणियाँ:
कोर्ट ने कहा कि वेटरनरी और FSL रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जब्त मांस गाय का था। गुजरात में गौहत्या और गौमांस का व्यापार पूरी तरह बैन है। दोषियों ने कोई वैध परमिशन प्रस्तुत नहीं की और ट्रायल में अपनी संदेहपूर्ण दलीलों को साबित करने में नाकाम रहे। वहीं, तीसरे आरोपी सलीम सिद्दीक को बरी किया गया क्योंकि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था।
कोर्ट ने सजा सुनाते समय कहा कि दोषी बाप-बेटे ने घर पर बेचने के लिए गौमांस का जथ्था खरीदा और हेराफेरी की। 2017 में किए गए गुजरात पशु संरक्षण कानून संशोधन को ध्यान में रखते हुए यह सजा दी गई ताकि समाज में ऐसे अपराधों पर रोक लग सके।
सजा और जुर्माना:
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सजा: 10-10 साल की जेल
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जुर्माना: 2 लाख रुपये
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जुर्माना न भरने पर जेल बढ़ाई जाएगी: 2 साल
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