22 फरवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का घोष वादन पहली बार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। यह विशेष कार्यक्रम 21 से 23 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले ‘रामार्चनम’ कार्यक्रम के अंतर्गत होगा, जिसमें दिल्ली प्रांत से आए लगभग 230 स्वयंसेवक हिस्सा लेंगे।
रामपथ पर भव्य पथ संचलन और घोष वादन
कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में रामपथ पर अनुशासित पथ संचलन करते हुए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुँचेंगे। मंदिर परिसर में पारंपरिक वाद्य यंत्रों — नगाड़ा, तुरही, शंख, बांसुरी और शृंग — के साथ घोष वादन प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रस्तुति सैन्य बैंड की शैली में तय धुनों और तालों पर आधारित होगी, जिसके लिए विशेष संगीत संरचना तैयार की गई है।
अनुशासन, संस्कृति और राष्ट्रभावना का संगम
एक साथ सैकड़ों स्वयंसेवकों की संगठित कदमताल और वादन कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन अनुशासन, संगठन शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देगा तथा भारतीय परंपराओं की झलक प्रस्तुत करेगा।
तीन महीने से चल रही तैयारी
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए पिछले तीन महीनों से लगातार अभ्यास सत्र, समन्वय बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। पथ संचलन के रूट प्लान, समय-सारिणी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि कार्यक्रम सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हो सके।
आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक
आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन दर्शाता है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगठन शक्ति और राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन रहा है।
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