अयोध्या में बुधवार को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के प्रतीक के रूप में अयोध्या की राजकुमारी और दक्षिण कोरिया की महारानी हो की 10 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया गया। मौसम खराब होने के कारण दक्षिण कोरिया से आने वाला प्रतिनिधिमंडल अयोध्या नहीं पहुँच सका, जिसके चलते प्रतिमा का औपचारिक अनावरण अयोध्या नगर निगम के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने किया। यह प्रतिमा उसी रानी की स्मृति में स्थापित की गई है, जिनका समुद्री मार्ग से कोरिया जाने का उल्लेख प्राचीन कथाओं में मिलता है।
ऐसा माना जाता है कि करीब 2000 वर्ष पहले अयोध्या की राजकुमारी सूरीरतन समुद्री यात्रा के माध्यम से कोरिया पहुँची थीं। वहाँ उनका विवाह करक वंश के राजकुमार किम सुरो से हुआ था। ईसा पूर्व 48 में वे हो वंश की महारानी बनीं और कोरियाई इतिहास में उन्हें महारानी हो के नाम से जाना गया।
महारानी हो की स्मृति में बने इस पार्क का शिलान्यास वर्ष 1999 में किया गया था। अयोध्या विकास प्राधिकरण, अयोध्या नगर निगम और दक्षिण कोरिया के सहयोग से इस पार्क का वर्षों से विस्तार किया जा रहा है। अब इसे और अधिक सुंदर व आकर्षक बनाने का कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

अयोध्या और कोरिया के प्राचीन संबंधों की यह गाथा भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को सांस्कृतिक मजबूती देती है। रानी हो की कहानी दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सरयू नदी के किनारे ‘क्वीन हो मेमोरियल पार्क’ का विकास किया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्मारक भारत और दक्षिण कोरिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को नई पहचान देता है।
पार्क में स्थापित महारानी हो की धातु से बनी प्रतिमा लगभग 10 फुट ऊँची है। इसे उसी धातु से तैयार किया गया है, जिससे प्रतिमाएँ दक्षिण कोरिया में बनाई जाती हैं। यह प्रतिमा न सिर्फ ऐतिहासिक स्मृति को संजोती है, बल्कि अयोध्या को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर भी मजबूती से स्थापित करती है।
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