रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा डाले जा रहे दबाव का कड़ा विरोध किया है। पुतिन ने साफ कहा कि भारत और चीन जैसे देश अब किसी के सामने झुकने वाले नहीं हैं और वे किसी भी तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि मोदी जी ऐसा कोई फैसला नहीं लेंगे, जिससे भारत को नुकसान पहुँचे। साथ ही, पुतिन ने चेतावनी दी कि यह दबाव अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था के लिए ही खतरनाक साबित हो सकता है।
पुतिन ने अमेरिका के रवैये को गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका रूस के व्यापारिक सहयोगियों पर टैक्स और प्रतिबंध लगाएगा, तो इससे दुनियाभर में महँगाई बढ़ेगी। इसका असर सीधे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें ऊँची ब्याज दरें बनाए रखनी पड़ेंगी और इसका नतीजा उनकी आर्थिक सुस्ती के रूप में सामने आएगा। पुतिन ने तीखे अंदाज में कहा कि “गुलामी का दौर अब खत्म हो चुका है” और अमेरिका को यह हकीकत स्वीकार करनी होगी।
🇷🇺 पुतिन का #Trump टैरिफ पर बयान:
"भारतीय जनता कभी अपमान स्वीकार नहीं करेगी।
मैं पीएम मोदी को जानता हूं, वे इस तरह के कदम कभी नहीं उठाएंगे।"
🗣️पुतिन ने कहा यहां पॉलिटिक्स नहीं प्योर इकोनॉमिक्स का मसला है जहां तक रूसी ऑयल की खरीद का सवाल है।#Putin #Modi #IndiaRussia #ValdaiClub pic.twitter.com/ryRg9bmvWE
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) October 3, 2025
भारत को लेकर पुतिन का रुख बेहद स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो उसे 9–10 अरब डॉलर का बड़ा नुकसान होगा। पुतिन ने मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि वे जानते हैं, मोदी जी भारत के हितों को नुकसान नहीं पहुँचने देंगे। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय जनता भी अपने नेतृत्व के निर्णयों पर पैनी नजर रखती है और देश के सम्मान से समझौता कभी स्वीकार नहीं करेगी। पुतिन ने यह भी जोड़ा कि रूस अब भारत से कृषि उत्पाद और दवाइयाँ ज्यादा मात्रा में खरीदकर व्यापार संतुलन बेहतर करने की दिशा में काम करेगा।
अमेरिका के दोहरे रवैये पर भी पुतिन ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ओर भारत को रूसी ऊर्जा खरीदने से रोकता है, जबकि खुद अपने परमाणु संयंत्रों के लिए रूस से यूरेनियम आयात करता है। यह दिखाता है कि अमेरिका वास्तव में रूस पर निर्भर है, लेकिन दूसरों पर रोक लगाना चाहता है।
यह पूरा विवाद तब तेज हुआ जब अमेरिकी नेताओं ने भारत की रूस से तेल खरीद की आलोचना की। ट्रंप के एक सलाहकार ने तो भारत को “टैरिफ का महाराजा” तक कह दिया और यह तक आरोप लगाया कि भारत का तेल खरीदना अमेरिकी नागरिकों की नौकरियाँ छीनने जैसा है। इन्हीं आलोचनाओं के जवाब में पुतिन ने भारत का मजबूती से बचाव किया और अमेरिका को सख्त संदेश दिया।
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