ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का चार दिवसीय आधिकारिक आर्मेनिया दौरा रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। राजधानी येरेवन पहुँचे जनरल चौहान एक उच्चस्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब भारत ने हाल ही में आर्मेनिया को स्वदेशी गाइडेड पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप सौंपी है। इस पृष्ठभूमि में यह दौरा भारत-आर्मेनिया रक्षा संबंधों को नई ऊँचाई देने और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, रणनीतिक समन्वय, प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक और भविष्य की संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। पिनाका रॉकेट डील ने भारत की रक्षा मौजूदगी को आर्मेनिया में मजबूत किया है। साल 2022 में लगभग 2,000 करोड़ रुपये की इस डील के तहत आर्मेनिया ने चार पिनाका सिस्टम खरीदने का फैसला किया था, जिससे वह DRDO द्वारा विकसित इस स्वदेशी हथियार प्रणाली का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गया। इससे पहले भारत अनगाइडेड रॉकेट सिस्टम की डिलीवरी भी पूरी कर चुका है। यह समझौता भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और तेजी से बढ़ते डिफेंस एक्सपोर्ट का स्पष्ट संकेत देता है।
An Indian defence delegation led by General Anil Chauhan, Chief of Defence Staff #CDS, reached Republic of Armenia on a four days official visit on 01 Feb.
The visit marks an important step in taking forward shared strategic interests and enhancing long-term defence and… pic.twitter.com/K7YPUEXMYj
— HQ IDS (@HQ_IDS_India) February 2, 2026
आर्मेनिया की भौगोलिक स्थिति इस यात्रा को और भी संवेदनशील बनाती है, क्योंकि यह रूस, तुर्की और ईरान जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के करीब स्थित है और ईरान के साथ इसकी सीमित लेकिन अहम भूमि सीमा भी है। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में इसी भूमि मार्ग का उपयोग किया गया था। ऐसे में आर्मेनिया भारत के लिए एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
इस दौरे का एक अप्रत्यक्ष संदेश पाकिस्तान के लिए भी माना जा रहा है। लंबे समय तक पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं रहे, क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम बहुल अजरबैजान का करीबी रहा है, जिसका आर्मेनिया के साथ पुराना संघर्ष चला आ रहा है। हालांकि, सितंबर 2025 में दोनों देशों ने सीमित स्तर पर कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाए थे। इसके अलावा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की के करीबी सहयोगी अजरबैजान का भारत विरोधी रुख भी सामने आया था। ऐसे हालात में आर्मेनिया में भारत की बढ़ती रक्षा और रणनीतिक सक्रियता न केवल दक्षिण काकेशस क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करती है, बल्कि पाकिस्तान और उसके सहयोगियों के लिए एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संकेत भी देती है।
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