आयरलैंड यूरोपियन यूनियन (EU) की अपनी आने वाली प्रेसिडेंसी का इस्तेमाल करते हुए पूरे यूरोप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य ID वेरिफिकेशन लागू कराने की पहल करने जा रहा है। इस मुद्दे पर आयरलैंड के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर साइमन हैरिस ने खुलकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि यह कदम ऑनलाइन गालीगलौज, फेक अकाउंट्स और बॉट्स की समस्या से निपटने के लिए जरूरी है। उन्हें उम्मीद है कि अन्य यूरोपीय देश भी इस मुहिम में आयरलैंड का समर्थन करेंगे।
दरअसल, आयरलैंड EU स्तर पर सोशल मीडिया के लिए एक सख्त और एकरूप नियमावली बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। सरकार का मानना है कि अनिवार्य ID वेरिफिकेशन से अनाम (एनोनिमस) अकाउंट्स की संख्या घटेगी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। यह फैसला खास तौर पर उन घटनाओं के बाद चर्चा में आया है, जिनमें नेताओं और आम लोगों को सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने जैसी धमकियाँ मिली हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइमन हैरिस और उनके परिवार को भी जान से मारने की धमकियाँ मिली थीं, जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। आयरिश मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में हैरिस ने कहा कि आयरलैंड में डिजिटल ऐज ऑफ कंसेंट 16 साल तय है, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। उनके मुताबिक, ID वेरिफिकेशन इस खामी को दूर करने में मदद कर सकता है।
हैरिस ने यह भी कहा कि एनोनिमस बॉट्स और फर्जी अकाउंट्स सिर्फ आयरलैंड की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या हैं। हाल ही में डबलिन की एक महिला को धमकी भरे मैसेज भेजने के मामले में सजा सुनाई गई, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है।
इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका पहले ही EU से तकनीकी रेगुलेशन को लेकर नाराजगी जता चुका है और उसका आरोप है कि कुछ यूरोपीय नेता अमेरिकी कंपनियों पर सेंसरशिप थोपने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद साइमन हैरिस को भरोसा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जैसे नेता इस पहल का समर्थन कर सकते हैं।
हैरिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ आयरलैंड या यूरोप का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के पास अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बनाने की क्षमता है और वे चाहें तो बिना किसी कानूनी दबाव के भी सख्त कदम उठा सकती हैं।
कुल मिलाकर, आयरलैंड की यह पहल ऑनलाइन दुर्व्यवहार, फेक न्यूज और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर यह मुहिम सफल होती है, तो पूरे यूरोप में सोशल मीडिया के नियम और डिजिटल माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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