प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित इस बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा एवं विदेश मामलों के साथ-साथ शासन से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के एजेंडे पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से केवल मौजूदा समस्याओं और आंकड़ों तक सीमित न रहने की अपील करते हुए देश के दीर्घकालिक भविष्य को ध्यान में रखकर नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।
PM मोदी ने कहा- सिर्फ आज नहीं, आने वाले वर्षों के भारत के बारे में सोचें
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिवों से कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को केवल तत्काल चुनौतियों, वर्तमान आंकड़ों और रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अधिकारियों को यह सोचने की जरूरत है कि आने वाले वर्षों में भारत की जरूरतें क्या होंगी और देश के भविष्य को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने दीर्घकालिक और भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण को शासन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि सरकारी नीतियों और फैसलों में वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों की भी तैयारी दिखाई देनी चाहिए।
Chaired a high-level meeting with Secretaries to the Government of India and discussed the future action agenda of Ministries and Departments pertaining to Infrastructure and Connectivity, Security and External Affairs and other aspects of Governance.
Emphasised the need for…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 20, 2026
सरकारी विभागों के ‘साइलो’ तोड़ने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी विभागों के बीच मौजूद ‘साइलो’ की समस्या का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साइलो केवल संगठनात्मक व्यवस्था से पैदा होने वाली समस्या नहीं है, बल्कि कई बार यह सोच और कार्यसंस्कृति से जुड़ी समस्या भी होती है।
उन्होंने अधिकारियों को क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार के साइलो को खत्म करने और अलग-अलग मंत्रालयों तथा विभागों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का पूर्ण स्वामित्व लेने और देश के प्रति अपनत्व की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने शासन में ‘Whole of Government’ यानी पूरी सरकार के एक साथ काम करने के दृष्टिकोण पर जोर दिया।
कोविड और पश्चिम एशिया संकट का दिया उदाहरण
प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया से जुड़े संकटों का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में अलग-अलग सरकारी विभागों और अधिकारियों ने मिलकर प्रभावी तरीके से काम किया था।
पीएम मोदी ने इसी तरह के समन्वय को सामान्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी अपनाने की जरूरत बताई, ताकि अलग-अलग मंत्रालय और विभाग साझा राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में एक टीम की तरह काम कर सकें।
‘डेटा राष्ट्रीय संपत्ति’, विभागों के सिस्टम जोड़ने की जरूरत
बैठक में डेटा मैनेजमेंट भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने डेटा को देश की राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार डेटा को एकत्र करने, सुरक्षित रखने और उसके प्रबंधन के लिए बड़ी मात्रा में संसाधन खर्च करती है। इसके बावजूद अलग-अलग विभागों के सिस्टम आपस में पर्याप्त रूप से जुड़े नहीं होने के कारण उपलब्ध डेटा की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता।
प्रधानमंत्री ने डेटा सिस्टम के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करने पर जोर दिया, ताकि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के पास उपलब्ध जानकारी का प्रभावी और समन्वित उपयोग हो सके।
‘AI का इस्तेमाल हो, लेकिन इंसानी समझ बनी रहे’
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती भूमिका पर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि AI की क्षमताओं को मानवीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि तकनीक फैसले लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती है, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप, अनुभव और निर्णय क्षमता को बरकरार रखना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों से AI के नए, अभिनव और रचनात्मक उपयोग के तरीकों पर काम करने को कहा, जिससे सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़े और तकनीक के साथ मानवीय समझ का संतुलन बना रहे।
विश्वविद्यालयों और युवाओं को नीति निर्माण से जोड़ने की बात
प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और युवा प्रतिभाओं के साथ व्यापक स्तर पर जुड़ने से सरकार को नीति निर्माण में नए विचार मिल सकते हैं। युवा पीढ़ी पारंपरिक सोच से अलग समाधान और नए दृष्टिकोण सामने ला सकती है, जो भविष्य की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य
बैठक में भारत के रक्षा उद्योग को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने रक्षा उद्योग की क्षमताओं को बढ़ाने और इसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए और आधुनिक पाठ्यक्रम विकसित करने तथा इस क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया।
इसका उद्देश्य देश में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता, कौशल और औद्योगिक क्षमता को लंबे समय तक मजबूत करना है।
समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम
भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बैठक में व्यापक रणनीति पर भी विचार किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग को पहले ही इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों से समीक्षा करने को कहा कि इस फैसले के बाद तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति हुई है या नहीं।
प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण से जुड़े प्रयासों को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
सीनियर और जूनियर अधिकारियों के बीच बढ़े संवाद
पीएम मोदी ने सरकारी अधिकारियों के बीच मजबूत टीम भावना विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से जूनियर अधिकारियों के साथ अधिक व्यक्तिगत और अनौपचारिक संवाद करने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने अलग-अलग कैडर, मंत्रालयों और विभागों में काम कर रहे अधिकारियों के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया, ताकि सरकार के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय और बेहतर हो सके।
बैठक के दौरान सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताओं, नई चुनौतियों, उभरते अवसरों और योजनाओं को लागू करने में सामने आने वाली समस्याओं को लेकर अपने अनुभव और सुझाव भी साझा किए।
क्यों अहम है पीएम मोदी की यह बैठक?
प्रधानमंत्री की यह बैठक केवल मंत्रालयों के मौजूदा कामकाज की समीक्षा तक सीमित नहीं रही। इसमें भविष्य के भारत के प्रशासनिक मॉडल, डेटा-आधारित शासन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग, विभागीय तालमेल, रक्षा आत्मनिर्भरता, समुद्री क्षमता और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर फोकस किया गया।
बैठक से सरकार का यह संदेश सामने आया कि आने वाले समय में शासन व्यवस्था को अधिक समन्वित, तकनीक-सक्षम और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर आधारित बनाने पर जोर रहेगा।
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