भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के संवेदनशील और लंबे समय से विवादित सुस्ता क्षेत्र में सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी ने नेपाल के सुस्ता गांव के करीब 150 से 200 अज्ञात ग्रामीणों पर भारतीय सीमा की ओर अवैध रूप से मिट्टी का बांध बनाने, जवानों के साथ दुर्व्यवहार करने और भारतीय क्षेत्र में घुसकर पथराव करने का आरोप लगाया है।
एसएसबी की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर वाल्मीकिनगर थाना पुलिस ने कांड संख्या 119/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना को लेकर नेपाल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गश्त के दौरान सामने आया बांध निर्माण का मामला
एसएसबी की 21वीं वाहिनी, बगहा के रमपुरवा कैंप प्रभारी अवधेश कुमार द्वारा वाल्मीकिनगर थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, यह घटना 2 अगस्त 2026 की है। उस दिन उप कमांडेंट विशाल कुमार, मुख्य आरक्षी त्रिदेव प्रसाद, आरक्षी गोपाल कुमार और अन्य जवान सीमा क्षेत्र में नियमित गश्त और सूचनाएं जुटाने के लिए निकले थे।
दोपहर करीब 2:15 बजे एसएसबी की टीम सुस्ता से सटे भारतीय सीमा क्षेत्र में स्थित पाकड़ के पेड़ के पास पहुंची। जवानों ने देखा कि नेपाल के सुस्ता गांव के कुछ ग्रामीण कथित रूप से भारतीय सीमा की ओर मिट्टी का बांध बनाने का काम कर रहे थे।
एसएसबी के जवानों ने निर्माण कार्य का विरोध किया और मौके पर मौजूद नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के अधिकारियों से बातचीत शुरू की।
संयुक्त बैठक में बनी थी नया निर्माण नहीं करने की सहमति
एसएसबी के आवेदन में कहा गया है कि घटना से तीन दिन पहले, 31 जुलाई 2026 को भारत और नेपाल के सुरक्षा अधिकारियों के बीच विवादित सुस्ता क्षेत्र को लेकर एक संयुक्त बैठक हुई थी।
बैठक में यह सहमति बनी थी कि सीमा विवाद पर अंतिम फैसला होने तक क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। दोनों पक्षों की ओर से किसी भी तरह का नया निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।
एसएसबी का आरोप है कि इस सहमति के बावजूद नेपाली ग्रामीणों ने भारतीय सीमा की दिशा में मिट्टी का बांध बनाना शुरू कर दिया।
लाठी-डंडे और पत्थरों के साथ पहुंची भीड़
आवेदन के अनुसार, एसएसबी अधिकारी जब नेपाल के एपीएफ अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे, तभी सुस्ता गांव के लगभग 150 से 200 ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
एसएसबी ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की भीड़ ने जवानों के साथ गाली-गलौज और बदसलूकी की। भीड़ ने सरकारी काम में बाधा डाली और लाठी-डंडे तथा पत्थरों के साथ आक्रामक हो गई।
हालात बिगड़ते देख एसएसबी के जवान पीछे हटकर भारतीय क्षेत्र में स्थित सेमल के पेड़ के पास आ गए। इसके बावजूद नेपाली ग्रामीणों की भीड़ पर निर्धारित सीमा रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने और पथराव करने का आरोप लगाया गया है।
पथराव के बाद कुछ समय के लिए पूरे सीमा क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ाते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।
150 से 200 अज्ञात नेपाली नागरिकों पर FIR
एसएसबी ने घटना को सीमा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। एसएसबी की ओर से वाल्मीकिनगर थाना में दिए गए लिखित आवेदन में सुस्ता गांव के 150 से 200 अज्ञात नेपाली नागरिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई।
वाल्मीकिनगर थाना पुलिस ने एसएसबी के आवेदन के आधार पर कांड संख्या 119/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वाल्मीकिनगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वर्षों से विवादित है सुस्ता सीमा क्षेत्र
सुस्ता भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित एक संवेदनशील और लंबे समय से विवादित इलाका है। यह क्षेत्र गंडक नदी के आसपास स्थित है, जिसे नेपाल में नारायणी नदी कहा जाता है।
नदी की धारा समय-समय पर बदलने के कारण सीमा निर्धारण को लेकर दोनों देशों के बीच वर्षों से मतभेद रहे हैं। नदी का मार्ग बदलने के बाद कई स्थानों पर सीमा रेखा और जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद पैदा हो जाता है।
इसी कारण सुस्ता क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण, खेती या अन्य गतिविधियों को लेकर भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरतती हैं।
हालिया घटना के बाद यह विवादित क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
नेपाल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
एसएसबी ने अपनी शिकायत में नेपाली ग्रामीणों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन नेपाल प्रशासन या नेपाल के सुरक्षा अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
पुलिस अब घटनास्थल, सीमा निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों, सुरक्षा बलों की रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
इससे पहले भी भारत-नेपाल सीमा पर धार्मिक यात्रा और जुलूस को लेकर तनाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल में बोलबम यात्रा निकालने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें गोली लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी।
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