दुनिया के अलग-अलग देशों में नियम-कानून, संस्कृति और परंपराएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं। यही विविधताएं हर देश को खास बनाती हैं। कैलेंडर की बात करें तो दुनिया के ज्यादातर देशों में ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रचलित है, जबकि भारत में शक् कैलेंडर को राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त है। इन सभी कैलेंडरों में महीनों और दिनों की संख्या संबंधित देशों की प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित होती है।
इसी कड़ी में एक ऐसा देश भी है, जिसका कैलेंडर दुनिया से बिल्कुल अलग है। यह संभवतः दुनिया का इकलौता देश है, जिसके कैलेंडर में 12 नहीं बल्कि पूरे 13 महीने होते हैं। यह देश है अफ्रीका का इथियोपिया, जो अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के लिए खास पहचान रखता है।
इथियोपिया उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो कभी पूरी तरह औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं आए। इटली ने 1935 में यहां उपनिवेश स्थापित करने की कोशिश की थी और करीब छह साल तक सैन्य कब्ज़ा भी बनाए रखा, लेकिन इथियोपियाई सेनाओं ने लगातार प्रतिरोध किया। पूरे देश पर कभी भी इटालियंस का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो पाया, और अंततः इथियोपिया ने अपनी स्वतंत्रता बरकरार रखी।
इथियोपिया के 13 महीनों वाले कैलेंडर के पीछे एक खास तर्क है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईसा मसीह के जन्म की गणना को लेकर इथियोपियाई कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से अलग है। इसी वजह से यह कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 7–8 साल पीछे चलता है। इसके पहले 12 महीनों में 30-30 दिन होते हैं, जबकि अंतिम महीने को ‘पगुमे’ कहा जाता है, जिसमें केवल 5 या लीप ईयर में 6 दिन होते हैं।
आज भी इथियोपिया अपने पारंपरिक कैलेंडर का उपयोग करता है। हालांकि, कैलेंडर के अंतर के कारण यात्रियों को आमतौर पर ज्यादा असुविधा नहीं होती। आधुनिक दौर में अधिकतर इथियोपियाई लोग ग्रेगोरियन कैलेंडर से भी परिचित हैं और कई लोग दोनों कैलेंडरों का समानांतर उपयोग करते हैं। इथियोपिया का नव वर्ष ‘एनकुटाटाश’ ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 11 या 12 सितंबर को मनाया जाता है।
After welcoming me at Addis Ababa airport, Prime Minister Dr. Abiy Ahmed Ali drove me to the Science Museum in the city. This Museum showcases different aspects of science and innovation and how they can be harnessed for Ethiopia’s progress.@AbiyAhmedAli pic.twitter.com/BKxxCBfKdk
— Narendra Modi (@narendramodi) December 16, 2025
इथियोपिया को ‘त्योहारों का देश’ भी कहा जाता है। यह देश अपने रंग-बिरंगे और जीवंत त्योहारों के लिए जाना जाता है। यहां का सबसे बड़ा त्योहार ‘तिमकेत’ है, जो तीन दिनों तक चलने वाला वार्षिक उत्सव है। यह पर्व जॉर्डन नदी में यीशु मसीह के बपतिस्मा की स्मृति में मनाया जाता है। इस दौरान पुजारी हर चर्च से ‘ताबोट्स’ यानी संधि की प्रतिकृति निकालते हैं और जुलूस के रूप में पास के जल स्रोत तक जाते हैं, जहां सामूहिक बपतिस्मा किया जाता है।
तिमकेत के दौरान हजारों स्थानीय लोग पारंपरिक सफेद पोशाक पहनकर जुलूस में शामिल होते हैं। पुजारियों के औपचारिक वस्त्र और रंग-बिरंगी मखमली छतरियां इस उत्सव को और भी भव्य बना देती हैं। यह दृश्य इथियोपिया की गहरी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
Gratitude to Prime Minister Abiy Ahmed Ali for showing me glimpses of Ethiopian history and culture at the National Palace Museum in Addis Ababa. It was a powerful reminder of Ethiopia’s rich traditions.@AbiyAhmedAli pic.twitter.com/yQYHbOYrCp
— Narendra Modi (@narendramodi) December 16, 2025
इसी बीच इथियोपिया भारत-इथियोपिया संबंधों के कारण भी चर्चा में है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार द्विपक्षीय दौरे पर इथियोपिया पहुंचे हैं। यहां नेशनल पैलेस में उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने खुद एयरपोर्ट पर मोदी का स्वागत किया और कार चलाकर उन्हें होटल तक ले गए।
इथियोपिया सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया। नरेंद्र मोदी यह सम्मान पाने वाले दुनिया के पहले ग्लोबल हेड ऑफ स्टेट या हेड ऑफ गवर्नमेंट बने हैं। सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि वे इस सम्मान को सभी भारतवासियों की ओर से विनम्रता और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने इसे भारत-इथियोपिया साझेदारी को मजबूत करने वाले अनगिनत भारतीयों का सम्मान बताया।
गौरतलब है कि अपने इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे, जिससे दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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