संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर साफ और सख्त रुख अपनाते हुए न सिर्फ पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को भी सुधार के मुद्दे पर आईना दिखा दिया। ‘शांति के लिए नेतृत्व’ विषय पर हुई खुली बहस में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए UNSC की मौजूदा संरचना अब अप्रासंगिक होती जा रही है।
न्यूयॉर्क में हुई इस बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना स्थायी शांति की उम्मीद के साथ की गई थी, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच सुरक्षा परिषद की सार्थक भूमिका न निभा पाने से उसकी वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने संकेतों में ही अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्यों को उनके संकीर्ण राष्ट्रीय हितों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
हरीश ने पहला बड़ा सवाल स्थायी सदस्यों की भूमिका पर उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिषद और खास तौर पर स्थायी सदस्यों की है। जब इन देशों का नजरिया वैश्विक जनहित पर केंद्रित रहा है, तब शांति की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन जब उन्होंने अपने सीमित राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी, तब संघर्ष और अस्थिरता बढ़ी है।
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🇮🇳🇺🇳 UN में #Pakistan
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📍भारत के स्थायी प्रतिनिधि एम्बेसडर हरीश ने कहा:
🔴 भारत ने 65 साल पहले सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से की थी
🔴 पाकिस्तान ने इन दशकों में 3 युद्ध और हजारों आतंकी हमलों से संधि की… pic.twitter.com/yYJgWxWvUN
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) December 16, 2025
दूसरे अहम बिंदु में भारत ने UNSC में व्यापक सुधार की जोरदार मांग की। हरीश ने कहा कि आठ दशक पुरानी परिषद की संरचना आज की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के शब्दों का हवाला देते हुए कहा कि “हम अपने दादा-दादी के लिए बनी प्रणालियों से अपने पोते-पोतियों का भविष्य नहीं गढ़ सकते।” भारत ने मांग की कि परिषद सुधार के लिए चल रही निष्फल अंतर-सरकारी वार्ताओं को छोड़कर समयबद्ध और ठोस लिखित वार्ता की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
तीसरे बिंदु में भारत ने बहुपक्षवाद को फिर से मजबूत करने की बात कही। हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय प्रणाली की प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए चल रही UN80 सुधार पहल में ‘शांति के लिए नेतृत्व’ को मूल मंत्र बनाना होगा। यह एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाला प्रयास होना चाहिए, जिसे भविष्य के महासचिव को आगे बढ़ाना होगा।
चौथे मुद्दे पर भारत ने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र का नेतृत्व वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों की आकांक्षाओं का सही प्रतिनिधित्व करे। इसमें विकास के लिए वित्त, जलवायु न्याय, सतत विकास लक्ष्य, और विदेशी सहायता जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो दुनिया की बहुसंख्यक आबादी से सीधे जुड़े हुए हैं।
पांचवें बिंदु में भारत ने स्पष्ट कहा कि संयुक्त राष्ट्र का कोई भी वरिष्ठ पद कुछ गिने-चुने देशों का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। नेतृत्व तभी प्रभावी और वैध होगा, जब नियुक्तियां पारदर्शी, निष्पक्ष और समावेशी प्रक्रिया के तहत हों।
छठे और अंतिम सुधार संबंधी बिंदु में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव में अधिक पारदर्शिता और पूर्वानुमान की मांग का समर्थन किया। हरीश ने कहा कि इस दिशा में अधिकांश सदस्य देशों द्वारा किए गए हालिया प्रयास सही कदम हैं और इन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इसके बाद भारत ने पाकिस्तान पर सीधा और तीखा हमला बोला। हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, थे और हमेशा रहेंगे। उन्होंने कहा कि UNSC जैसे मंचों पर कश्मीर का बार-बार अनुचित उल्लेख करना पाकिस्तान की भारत-विरोधी सनक को दर्शाता है और एक अस्थायी सदस्य के रूप में उसके दायित्वों के विपरीत है।
🇺🇳🇮🇳|| India at UNSC Open Debate on “Leadership for Peace” Ambassador Parvathaneni Harish
India demanded urgent, time-bound UNSC reforms with stronger Global South representation and “Leadership for Peace” at the core of UN80 pic.twitter.com/Oobrny5ilU
— Abhimanyu Manjhi (@AbhimanyuManjh5) December 16, 2025
सिंधु जल संधि पर भारत ने बड़ी और स्पष्ट लाइन खींचते हुए कहा कि भारत ने 65 साल पहले सद्भावना के साथ इस संधि में प्रवेश किया था, लेकिन पाकिस्तान ने तीन युद्धों और हजारों आतंकी हमलों के जरिए इसकी भावना को लगातार तोड़ा। भारत ने ऐलान किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और हर प्रकार के आतंकी समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से खत्म नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी।
अंत में भारत ने पाकिस्तान के आंतरिक हालात पर भी तीखा कटाक्ष किया। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने लोगों की इच्छा का सम्मान करने के नाम पर प्रधानमंत्री को जेल में डालता है, राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाता है और सैन्य नेतृत्व को संवैधानिक संरक्षण देता है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के हर रूप का पूरी ताकत से मुकाबला करता रहेगा।
अपने बयान के समापन में भारत ने यह भी दोहराया कि वह बहुपक्षवाद में अटूट विश्वास रखता है और सभी देशों के लिए शांति, सुरक्षा और समृद्धि के साझा लक्ष्य की दिशा में सक्रिय योगदान देने को तैयार है।
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