अमेरिका पर टैरिफ का दबाव बनाने की कोशिश में जुटे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चीन की हालिया विक्ट्री परेड एक बड़ा संदेश बनकर सामने आई है। बीजिंग में आयोजित इस परेड में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन नजर आए। परमाणु ताकत से लैस इन तीन देशों के नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर ने ट्रंप को असहज कर दिया है।
अब चीन को लेकर भी डॉनल्ड ट्रंप की सहृदयता ख़त्म हो रही है… चीन के विक्ट्री डे परेड के मौक़े पर कह रहे हैं युद्ध में अमेरिका की भूमिका याद करनी चाहिए …कहते हैं मेरा रिगार्ड राष्ट्रपति पुतिन और किम जोंग को दें वो भी तब जब आप सब अमेरिका के खिलाफ साज़िश कर रहे हैं। pic.twitter.com/HAnWBrG51I
— Kadambini Sharma (@SharmaKadambini) September 3, 2025
यह परेड 1945 में जापान के सरेंडर और चीन की जीत की 80वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में आयोजित की गई। खास बात यह रही कि अमेरिका से लंबे समय से टकराव झेल रहे रूस और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता चीन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते नजर आए। यह दृश्य अमेरिकी रणनीतिक हलकों में चिंता का कारण बन गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की दुनियाभर के देशों से बढ़ती बेरुखी का फायदा उठाने के लिए चीन अब नए मौके तलाश रहा है। हाल ही में चीन में हुए एससीओ समिट में दुनिया के बड़े नेता, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए थे। उसके तुरंत बाद चीन ने अपनी सैन्य ताकत दिखाने के लिए इस परेड में वैश्विक नेताओं को आमंत्रित किया। चीन इसके साथ ही कई देशों के साथ द्विपक्षीय सैन्य सम्मेलन करने की भी तैयारी में है।
अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश अगर एक मंच पर आ जाते हैं तो यह उसकी वैश्विक स्थिति को चुनौती देगा। खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव अमेरिका की रणनीति के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि अमेरिका लगातार चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश करता रहा है।
अमेरिकी लेखक जॉन मियरशाइमर ने अपनी किताब द ट्रेजडी ऑफ ग्रेट पावर पॉलिटिक्स में करीब एक दशक पहले ही चेतावनी दी थी कि चीन का तेजी से उभरना अमेरिका के लिए बेहद खतरनाक होगा। उन्होंने लिखा था कि अगर रूस और चीन साथ आते हैं, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़े खतरे से कम नहीं होगा। मौजूदा हालात इस भविष्यवाणी को सही साबित करते दिख रहे हैं।
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