यूरोप के 26 देशों ने मिलकर यूक्रेन के लिए सिक्योरिटी फोर्स बनाने और उसकी सेना को मजबूत करने का ऐलान किया है। इस कदम ने रूस को खासा नाराज कर दिया है। रूस ने इसे यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कड़ी आलोचना की। मॉस्को का कहना है कि यूक्रेन को इस तरह की सुरक्षा गारंटी देना उसके लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।
रूस की चेतावनी
रूस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अगर किसी भी रूप में विदेशी सैनिकों की तैनाती यूक्रेन में की जाती है, तो इसे “उकसाने वाली कार्रवाई” माना जाएगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि रूस की इस धमकी के बावजूद, यूरोपीय नेताओं ने सिक्योरिटी फोर्स के गठन पर आगे बढ़ते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात कर रूस से सुरक्षा गारंटी दिलवाने की मांग रखी।
#WATCH | Permanent Representative of India to the United Nations in New York, Parvathaneni Harish says, "India continues to remain concerned over the situation in Ukraine. We maintain that the loss of innocent lives is unacceptable, and no solution can be found on the… pic.twitter.com/pCY5mmMxlx
— ANI (@ANI) September 5, 2025
यूरोपीय देशों का निर्णय
इस सिक्योरिटी फोर्स में 26 यूरोपीय देश शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य यूक्रेन में युद्धविराम या शांति की स्थिति में सुरक्षा गारंटी प्रदान करना और सेना को मजबूत करना है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रोन ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यूरोपीय देशों के इस कदम को जल्द ही अमेरिका का समर्थन भी मिलेगा। इस फोर्स में फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और जर्मनी जैसे बड़े देश अहम भूमिका निभाएंगे।
सैनिकों की भूमिका
समझौते के मुताबिक, इस सिक्योरिटी फोर्स के सैनिक सीधे फ्रंटलाइन पर नहीं लड़ेंगे, बल्कि फ्रंटलाइन से दूर तैनात रहकर मददगार की भूमिका निभाएंगे। अमेरिका की बात करें तो राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी जमीनी सैनिक यूक्रेन में नहीं भेजे जाएंगे, हालांकि उन्होंने हवाई सेना तैनात करने की संभावना जताई थी। फिलहाल अमेरिका ने यूक्रेन में सैनिक भेजने का कोई फैसला नहीं लिया है।
भारत की भूमिका
इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय नेताओं से बातचीत करते हुए रूस को युद्ध रोकने और शांति के रास्ते पर लाने का अनुरोध किया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि केवल कूटनीति और संवाद ही रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कर सकते हैं। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और अन्य नेताओं ने भी पीएम मोदी से फोन पर बात की और रूस पर कूटनीतिक दबाव बनाने की गुजारिश की।
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