अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के लगभग दो वर्ष बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली से अपना पहला सार्वजनिक लाइव संबोधन दिया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में आयोजित किया गया, जहाँ उनका संबोधन वर्चुअल माध्यम से प्रसारित किया गया।
भाषण की शुरुआत में हुईं भावुक
अपने संबोधन की शुरुआत करते ही शेख हसीना भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि वे केवल पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में दुनिया से बात कर रही हैं।
उन्होंने 1975 में अपने परिवार की हुई हत्या को याद करते हुए कहा कि वह दर्द आज भी उनके साथ है। उन्होंने कहा कि वह अपने देश से दूर जरूर हैं, लेकिन बांग्लादेश की जनता से कभी अलग नहीं हुईं।
“दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी”
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें पता है कि देश लौटने पर उन्हें जेल भेजा जा सकता है या उनकी हत्या भी हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित, गैरकानूनी और असंवैधानिक हैं। उन्होंने कहा कि मौत की सजा या झूठे मुकदमे उन्हें डरा नहीं सकते।
2024 के आंदोलन पर लगाया बड़ा आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य छात्र आंदोलन नहीं था।
उनके अनुसार सरकार ने हर मुद्दे को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से हल करने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों का इस्तेमाल सत्ता परिवर्तन के लिए किया।
उन्होंने कहा कि कोटा आंदोलन केवल एक बहाना था, जबकि वास्तविक उद्देश्य उनकी लोकतांत्रिक सरकार को गिराना था।
मोहम्मद यूनुस सरकार पर सवाल
शेख हसीना ने पूर्व केयरटेकर प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपियों को संरक्षण दिए जाने जैसे बयान सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया, तो निष्पक्ष जांच को आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया।
अल्पसंख्यकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चिंता
अपने संबोधन में शेख हसीना ने आरोप लगाया कि वर्तमान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, सांस्कृतिक हस्तियों और आम नागरिकों पर हमले बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि मुक्ति संग्राम के समर्थकों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि उग्रवादी तत्वों को रिहा किया जा रहा है।
साजीब वाजेद जॉय ने भी उठाए सवाल
शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों और सरकारी दावों के बीच अंतर की जांच की मांग की।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बांग्लादेश में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच करने की अपील की और कहा कि वर्तमान हालात पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय हैं।
बांग्लादेशी मीडिया की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बांग्लादेश के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में इस लाइव संबोधन को प्रमुखता नहीं मिली।
वहीं भारतीय मीडिया ने नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम और शेख हसीना के बयानों को व्यापक कवरेज दी। इस अंतर को लेकर प्रेस की स्वतंत्रता और मौजूदा परिस्थितियों पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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