उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के साथ उन्हें पर्यटन एवं स्थानीय विकास के प्रमुख केंद्रों के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत कबीर नगर दौरे के दौरान बाबा तामेश्वरनाथ धाम को भव्य स्वरूप देने और यहां एक आधुनिक कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या धाम, काशी विश्वनाथ धाम और मां विंध्यवासिनी धाम में धार्मिक परिसरों का पुनर्विकास किया गया है, उसी प्रकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को भी नई पहचान दी जाएगी।
प्रस्तावित कॉरिडोर से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि संत कबीर नगर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन, स्थानीय व्यापार तथा रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
बैजूनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम में घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार, 25 जून 2026 को कुआनो नदी के तट पर स्थित श्री बैजूनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ धाम, बाबा बैजूनाथ धाम और क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण केवल आस्था से जुड़ा कार्य नहीं है। यह उन पूर्वजों और संत परंपराओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है, जिन्होंने इन सांस्कृतिक धरोहरों की स्थापना की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास विरासत के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार—दोनों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
तामेश्वरनाथ धाम में बनेगा भव्य कॉरिडोर
योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि सरकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को भव्य कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम करेगी।
कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किए जाने की संभावना है।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के साथ भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य तामेश्वरनाथ धाम को पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करना है।
धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
सरकार का मानना है कि तामेश्वरनाथ धाम के विकास से संत कबीर नगर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, भोजनालय, परिवहन, फूल-प्रसाद, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इससे स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी तैयार हो सकते हैं। धार्मिक स्थलों को विकास केंद्र बनाने की नीति के अंतर्गत सरकार आस्था, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़कर देख रही है।
₹475 करोड़ से अधिक की 139 परियोजनाओं की सौगात
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत कबीर नगर के धनघटा और गोरखपुर के खजनी विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित ₹475 करोड़ से अधिक लागत की 139 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
इन परियोजनाओं में सड़क संपर्क, सार्वजनिक भवन, शिक्षा, पेयजल, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बिना भेदभाव के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जो क्षेत्र कभी पिछड़े माने जाते थे, वे अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक ढांचे के विस्तार के कारण विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
पूर्वांचल में सड़क और औद्योगिक विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्वांचल के बदलते विकास परिदृश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, राजमार्गों और संपर्क मार्गों के विस्तार से लोगों की आवाजाही आसान हुई है तथा औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
बेहतर कनेक्टिविटी के कारण छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े बाजारों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे कृषि उत्पादों, स्थानीय उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिए भी नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों और नए शिक्षा संस्थानों के विस्तार से युवाओं को अपने क्षेत्र के निकट रोजगार एवं कौशल विकास के अवसर मिलने लगे हैं।
6.18 लाख परिवारों को मिलेगा पक्का आवास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 6.18 लाख नए पात्र परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित और पक्का घर उपलब्ध कराना है। आवास योजना को शौचालय, बिजली, रसोई गैस और पेयजल जैसी अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और वंचित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के उपलब्ध कराया जा रहा है।
बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म का केंद्र
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संत कबीर नगर की प्रसिद्ध बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया।
बखिरा झील अपनी जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए जानी जाती है। इसके सुनियोजित विकास से पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इको-टूरिज्म सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और आसपास के गांवों में रोजगार, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन तथा पारंपरिक उत्पादों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
सरकार का जोर इस बात पर रहेगा कि पर्यटन विकास के दौरान झील की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता को सुरक्षित रखा जाए।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर नगर और गोरखपुर क्षेत्र में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
सरकारी विद्यालयों के कायाकल्प, उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार और स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाने की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आधारभूत ढांचे का विकास तभी सार्थक होगा, जब आम नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और परिवहन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौरान नागरिक अधिकारों को निलंबित किया गया, विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया था।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करने वालों को आपातकाल के इतिहास को भी याद रखना चाहिए।
उन्होंने लोगों से विकास और विरासत संरक्षण की योजनाओं में प्रदेश सरकार का सहयोग करने की अपील की।
आस्था के साथ विकास की रणनीति
तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर की घोषणा को उत्तर प्रदेश सरकार की ‘आस्था के साथ विकास’ की नीति का विस्तार माना जा रहा है।
अयोध्या, काशी और विंध्याचल में धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास के बाद सरकार अब पूर्वांचल के अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों को भी बेहतर सुविधाओं से जोड़ने पर ध्यान दे रही है।
तामेश्वरनाथ धाम और बैजूनाथ धाम के विकास से संत कबीर नगर को सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान मिलने के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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