अमेरिका के टेक्सास राज्य के डलास में भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का भव्य स्वरूप देखने को मिला। मैसूर स्थित अवधूत दत्त पीठम के संस्थापक परमपूज्य श्री गणपति सच्चिदानंद स्वामी जी के दिव्य मार्गदर्शन और नेतृत्व में 3 अगस्त को डलास के क्यूटेक्स ऑडिटोरियम में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता पारायण का ऐतिहासिक सामूहिक आयोजन संपन्न हुआ।
इस विशाल आध्यात्मिक आयोजन में करीब 10,000 भक्तों ने कंठस्थ श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 700 श्लोकों का सामूहिक पारायण किया। हजारों श्रद्धालुओं की एक साथ गीता के श्लोकों की गूंज से पूरा ऑडिटोरियम भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
स्वामी जी की अमेरिका में 50 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा का उत्सव
यह आयोजन श्री गणपति सच्चिदानंद स्वामी जी की अमेरिका में 50 वर्षों की स्वर्णिम आध्यात्मिक यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला का प्रमुख हिस्सा था।
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें विश्व के 18 देशों से आए श्रद्धालुओं, हजारों विद्यार्थियों और अनेक प्रतिष्ठित स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश को विश्व के सामने प्रस्तुत किया गया।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ रहा आयोजन का मूल संदेश
इस ऐतिहासिक गीता पारायण का प्रमुख उद्देश्य भारतीय सनातन जीवन-दृष्टि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, अर्थात् ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है’, के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और उसे जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना था।
आयोजन के माध्यम से शांति, मानवता, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक समन्वय का संदेश भी दिया गया। हजारों लोगों द्वारा एक स्वर में गीता पाठ ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर स्वामी जी का विशेष संदेश
अपने आशीर्वचन में परमपूज्य श्री गणपति सच्चिदानंद स्वामी जी ने संदेश दिया—
“ईश्वर भारत का भला करे, ईश्वर अमेरिका का भला करे और ईश्वर विश्व का भला करे।”
उन्होंने अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है कि वह भारत और अमेरिका के संबंधों को आध्यात्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक समन्वय और मानवीय सद्भाव के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाए।
विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना
इस अवसर पर स्वामी जी के मार्गदर्शन में ‘विश्व शांति के लिए प्रार्थना’ का भी विशेष आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का यह सामूहिक पारायण प्रत्येक परिवार की शांति और कल्याण, सामाजिक सद्भाव तथा संपूर्ण विश्व के मंगल और शांति की भावना से किया गया है।
डलास में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल हजारों श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़ा, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत, गीता के संदेश और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को वैश्विक स्तर पर सामने रखने का भी प्रयास किया।
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