उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दशहरे पर इस बार अनोखा विवाद सामने आया है। सोमवार को पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 240 फुट ऊंचे रावण और 190 फुट ऊंचे मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों के दहन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन का कहना है कि इतने विशालकाय पुतलों का दहन सुरक्षा दृष्टि से खतरनाक हो सकता है।
यह आयोजन अयोध्या की फिल्म कलाकार रामलीला समिति द्वारा किया जा रहा था। राम कथा पार्क में एक महीने से इन पुतलों का निर्माण कार्य चल रहा था। हालांकि, पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेश चतुर्वेदी के अनुसार, समिति ने इन पुतलों के निर्माण और दहन के लिए अभी तक प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। गश्त के दौरान जब पुलिस ने इन विशाल पुतलों का निर्माण देखा, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए दहन पर रोक लगा दी गई।
फिल्म कलाकार रामलीला समिति के संस्थापक अध्यक्ष सुभाष मलिक ने प्रशासन के इस कदम पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए कारीगरों ने 240 फुट ऊंचे रावण समेत तीनों पुतलों का निर्माण पूरा किया था। दहन से ठीक तीन दिन पहले प्रतिबंध लगाने से न केवल हजारों रुपये खर्च व्यर्थ चले गए, बल्कि परंपरा के लिहाज से यह भी अशुभ माना जाता है।
सुभाष मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि अयोध्या में कहीं भी इन 240 फुट ऊंचे पुतलों का दहन करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि वे बीजेपी के छोटे कार्यकर्ता हैं और बीते सात साल से अयोध्या में भव्य रामलीला के मंचन में जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, इतनी मेहनत और श्रद्धा से बनाए गए पुतलों का दहन न होना न केवल कलाकारों के लिए निराशाजनक है, बल्कि आस्था पर भी आघात है।
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