सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर 2025) को एक अहम कदम उठाते हुए देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित उन याचिकाओं को अपने अधीन ले लिया है, जिनमें विभिन्न राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। यह पूरा मामला Citizens for Justice and Peace बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य से जुड़ा हुआ है। कोर्ट पहले से ही उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अब अन्य हाई कोर्ट्स में दाखिल समान प्रकृति की याचिकाएँ भी सुप्रीम कोर्ट के पास ट्रांसफर हो जाएँगी ताकि इस मुद्दे पर एक व्यापक और एकरूप फैसला सुनाया जा सके।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएँ अलग-अलग कोर्ट्स में पेंडिंग हैं, जिससे फैसले में असमानता और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनकर इस विषय पर समग्र निर्णय लिया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने सहमति जताई और कहा कि सभी याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दी जाएँगी। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कानूनों के संचालन पर रोक लगाने की मांग पर छह हफ्ते बाद विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि इन कानूनों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धर्मांतरण विरोधी कानूनों का दुरुपयोग कर खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद को इस मामले में हस्तक्षेप की अनुमति भी दी थी। संगठन का आरोप है कि इन कानूनों के नाम पर मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला हो रहा है।
दूसरी ओर, संबंधित राज्य सरकारों का तर्क है कि धर्मांतरण विरोधी कानून का मकसद जबरन या धोखाधड़ी से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है, ताकि सामाजिक संतुलन और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे। अब चूँकि यह मुद्दा सीधे सुप्रीम कोर्ट के अधीन आ गया है, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में शीर्ष अदालत इस संवेदनशील मामले पर एक ठोस और ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी, जो देश भर में धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के संतुलन को लेकर दिशा-निर्देश तय करेगा।
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