अफगानिस्तान के साथ सीमा पर जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत पर तीखे आरोप लगाए।
जरदारी ने दावा किया कि भारतीय नेता “एक और युद्ध” की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत से ‘युद्ध के मैदान’ से हटकर बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की और कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
‘जल-आतंकवाद’ का आरोप और सिंधु जल संधि विवाद
राष्ट्रपति जरदारी ने Indus Waters Treaty को स्थगित करने के भारत के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे ‘हाइड्रो-टेररिज्म’ (जल-आतंकवाद) करार देते हुए आरोप लगाया कि नई दिल्ली पानी के बहाव को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इसके समाधान के बिना दक्षिण एशिया में स्थायी शांति संभव नहीं है।
तालिबान पर आरोप, दोहा समझौते का हवाला
अफगानिस्तान मोर्चे पर स्थिति पर बोलते हुए जरदारी ने तालिबान सरकार पर दोहा समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की धरती ‘पवित्र’ है और इसे अस्थिर करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
दोहा समझौता, जो 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ था, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम माना जाता है।
संसद में पीटीआई का हंगामा
जरदारी के भाषण के दौरान संसद में विपक्षी दल Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) के सदस्यों ने इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर नारेबाजी की।
इस हंगामे ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया और राष्ट्रपति के संबोधन को कई बार बाधित किया।
दोहरी चुनौती से जूझता पाकिस्तान
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है—एक ओर अफगान सीमा पर तनाव और दूसरी ओर घरेलू राजनीतिक संकट। ऐसे में भारत पर आरोपों को कूटनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
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