उत्तर प्रदेश ने आर्थिक क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कभी ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी में गिने जाने वाला यूपी आज देश का सबसे ज्यादा रेवेन्यू सरप्लस कमाने वाला राज्य बन गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में उत्तर प्रदेश ₹37,263 करोड़ के राजस्व अधिशेष के साथ देश में पहले स्थान पर रहा। यह उपलब्धि खास इसलिए भी है क्योंकि यूपी पेट्रोलियम उत्पादों पर सबसे कम टैक्स वसूलता है।
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2023 तक देश के 28 राज्यों में से 16 राज्य राजस्व अधिशेष की स्थिति में थे और 12 राज्य घाटे में चल रहे थे। अधिशेष की सूची में यूपी के बाद गुजरात (₹19,865 करोड़) और ओडिशा (₹19,456 करोड़) का स्थान रहा। झारखंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गोवा भी अधिशेष वाले राज्यों में शामिल हैं। पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और मणिपुर भी अधिशेष वाले राज्यों में गिने गए।
CAG Report
UP is the top revenue surplus state!
Crazy fiscal management by the state.
UP also tops the list of states with highest capital expenditure while having the lowest taxes on petroleum. pic.twitter.com/rfbqfaXvKi
— The Uttar Pradesh Index (@theupindex) September 22, 2025
दूसरी ओर, 12 राज्यों का संयुक्त राजस्व घाटा ₹2,22,648 करोड़ रहा। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। घाटे को पाटने के लिए 2022-23 में वित्त आयोग ने ₹86,201 करोड़ का अनुदान जारी किया, जो कुल घाटे का लगभग 39% था।
राजस्व घाटा अनुदान पाने वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर रहा, जिसे कुल अनुदान का 15.76% मिला। इसके बाद केरल (15.28%), आंध्र प्रदेश (12.24%), हिमाचल प्रदेश (10.88%), पंजाब (9.60%), उत्तराखंड (8.28%), असम (5.67%), राजस्थान (5.64%), नागालैंड (5.26%) और त्रिपुरा (5.13%) का स्थान आता है। इन 10 राज्यों को कुल अनुदान का लगभग 94% हिस्सा मिला।
सीएजी की रिपोर्ट में कुछ राज्यों की टैक्स व्यवस्था की भी तारीफ की गई है। हरियाणा इस सूची में सबसे ऊपर है, जिसने अपनी कुल आय का 80% हिस्सा खुद कर संग्रह से जुटाया। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और गोवा का स्थान आता है। इन राज्यों ने टैक्स सिस्टम में सुधार करके अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूती दी है।