पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता संभालते ही एक अहम और सख्त फैसला लिया है। राज्य सरकार ने पूर्व ममता बनर्जी सरकार के दौरान विभिन्न बोर्डों, गैर-सांविधिक निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और संगठनों में नियुक्त सभी मनोनीत अध्यक्षों, निदेशकों और सदस्यों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है।
सेवानिवृत्ति के बाद एक्सटेंशन वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सरकारी आदेश के अनुसार, 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु पूरी करने के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को इस आदेश पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस फैसले से कुल कितने अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित होंगे।
पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले
11 मई 2026 को हुई पहली कैबिनेट बैठक में शुभेंदु सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इनमें प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने पर भी जोर दिया गया।
बॉर्डर सुरक्षा और भूमि हस्तांतरण पर फैसला
सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन हस्तांतरण की मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया अगले 45 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
आयुष्मान भारत योजना लागू करने का निर्णय
राज्य सरकार ने केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत को पश्चिम बंगाल में लागू करने का भी फैसला किया है। इसके साथ ही अन्य केंद्रीय योजनाओं को भी राज्य में लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
इन फैसलों को पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक पुनर्गठन और नई सरकार की नीति बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे राज्य के प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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