कर्नाटक की सियासत एक बार फिर करवट ले रही है और सत्ता की साझेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने अचानक दिल्ली पहुँचकर पार्टी हाईकमान पर राजनीतिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है। लगभग 10 विधायकों का यह समूह सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने से पहले सत्ता परिवर्तन की माँग उठा रहा है। ये विधायक जोर देकर कह रहे हैं कि सरकार बनते समय जो समझौता हुआ था—जिसके तहत ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद डीके शिवकुमार को दिया जाना था—अब उसे पूरा किया जाए।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब मई 2023 में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद से ही सत्ता के फॉर्मूले पर सवाल उठते रहे हैं। अब, जब सरकार अपने आधे कार्यकाल के करीब है, शिवकुमार गुट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वादा कागज़ों से निकलकर हकीकत बने। दिल्ली पहुँचे इन विधायकों की शुक्रवार (21 नवंबर 2025) को AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक तय है। अनुमान है कि इस मुलाकात में ही विधायकों का प्रतिनिधिमंडल आधिकारिक तौर पर सत्ता हस्तांतरण की माँग रखेगा।
फिलहाल दिल्ली आए विधायकों में दिनेश गुलीगौड़ा, रवि गनिगा, गब्बी वासु, अनेकल शिवन्ना, नेलमंगला श्रीनिवास, इकबाल हुसैन, कुनिगल रंगनाथ, शिवगंगा बसवराजू और बालकृष्णा शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी विधायक उनके साथ जुड़ सकते हैं, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ेगा। इस स्थिति ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के अंदर असंतोष, गुटबाजी और नेतृत्व परिवर्तन के संकेत तेज कर दिए हैं और अब नजरें हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं—जो या तो मौजूदा नेतृत्व को सुरक्षित रखेगा या सत्ता का नया अध्याय लिखेगा।
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