उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मनसा देवी मंदिर हादसे के बाद राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरिद्वार स्थित मनसा देवी और चण्डी देवी मंदिर, टनकपुर का पूर्णागिरी धाम, नैनीताल का कैंची धाम, अल्मोड़ा का जागेश्वर मंदिर, पौड़ी का नीलकंठ महादेव मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन का अनुभव मिल सके इसके लिए मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं का पंजीकरण, पैदल मार्गों व सीढ़ियों का चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाना, और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए अलग व सुव्यवस्थित रास्ते बनाने और अतिक्रमण हटाने के भी निर्देश दिए।
सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक में तीर्थाटन में हो रही बढ़ोतरी और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मनसा देवी मंदिर, नीलकंठ महादेव, धारी देवी, पूर्णागिरि मंदिर, कैंचीधाम व जागेश्वर सहित राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के सुनियोजित विकास हेतु आवश्यक निर्देश दिए।
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— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 28, 2025
सीएम धामी ने यह भी निर्देश दिया कि कुमाऊँ और गढ़वाल मंडलों के आयुक्तों की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाए। इस समिति में जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित जिलों की कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसरों की धारण क्षमता बढ़ाने, व्यवस्थित दुकान प्रबंधन और सुनियोजित विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण को अनिवार्य बनाने और दर्शन व्यवस्था को चरणबद्ध करने का निर्देश दिया, ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे और किसी को असुविधा न हो।
इस बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, एस.एन. पाण्डेय, सचिव एवं गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमन, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और अपर सचिव बंशीधर तिवारी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।