लद्दाख प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सात जिलों में निर्वाचित स्वशासन व्यवस्था लागू करने का बड़ा फैसला किया है। इसके तहत लेह, कारगिल, शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास में एक-एक ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल यानी स्वायत्त हिल विकास परिषद का गठन किया जाएगा।
इस फैसले को लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में होने वाले सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक माना जा रहा है। नई व्यवस्था से स्थानीय समुदायों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भूमि, रोजगार, विकास योजनाओं, वित्तीय संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े फैसलों में पहले से अधिक भूमिका मिलने की उम्मीद है।
अब तक लद्दाख में केवल लेह और कारगिल जिलों में ही निर्वाचित स्वायत्त हिल विकास परिषदें काम कर रही थीं। नई घोषणा के बाद हाल में बनाए गए पांच जिलों शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास को भी अपनी-अपनी निर्वाचित हिल काउंसिल मिलेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नई परिषदों को सीमित या अलग अधिकार नहीं दिए जाएंगे। इन्हें वही कानूनी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो वर्तमान में लेह और कारगिल की स्वायत्त हिल विकास परिषदों के पास हैं।
अप्रैल 2026 में दो से बढ़ाकर सात किए गए थे जिले
लद्दाख प्रशासन ने अप्रैल 2026 में केंद्र शासित प्रदेश के जिलों की संख्या दो से बढ़ाकर सात कर दी थी। इससे पहले लद्दाख में केवल लेह और कारगिल जिले थे।
प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास को अलग-अलग जिलों के रूप में अधिसूचित किया गया। नए जिलों के गठन के बावजूद जिला स्तर पर निर्वाचित शासन व्यवस्था केवल लेह और कारगिल तक सीमित थी।
अब सभी जिलों में स्वायत्त हिल विकास परिषदों के गठन की घोषणा के बाद यह असमानता समाप्त होने की उम्मीद है। आवश्यक कानूनी और चुनावी औपचारिकताओं के बाद लद्दाख के हर जिले में अपनी निर्वाचित परिषद काम करेगी।
#WATCH | Leh, Ladakh: On major administrative reforms, Chief Secretary, Ladakh, Ashish Kundra says, “…Today, the Lieutenant Governor decided to establish dedicated engineering wings for the PWD, Rural Works, and PHE departments in every district; this has been announced, and… pic.twitter.com/bgXzYiiVs2
— ANI (@ANI) July 13, 2026
मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने की घोषणा
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सरकार लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद अधिनियम में पहले से उपलब्ध प्रावधानों के तहत हर जिले में परिषद गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
मुख्य सचिव के अनुसार, LAHDC अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 1 सरकार को यह अधिकार देती है कि वह राजपत्र में अधिसूचना जारी कर किसी तय तारीख से प्रत्येक जिले में स्वायत्त हिल विकास परिषद का गठन कर सकती है।
प्रशासन का कहना है कि परिषदों के गठन के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा पहले से मौजूद है। हालांकि नई परिषदों का कामकाज शुरू होने से पहले कुछ कानूनी संशोधन, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन पूरा करना होगा।
पांच नए जिलों में लंबे समय से उठ रही थी मांग
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास में निर्वाचित हिल काउंसिल के गठन की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
स्थानीय समुदायों और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने प्रशासन को लिखित अनुरोध देकर अपने-अपने जिलों में LAHDC के गठन की मांग की थी। लोगों का कहना था कि जिले बनने के बाद उन्हें जिला स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए।
मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि सरकार का फैसला स्थानीय लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे सभी क्षेत्रों को अपने विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों में प्रभावी आवाज मिलेगी।
प्रशासनिक पुनर्गठन लगभग पूरा
मुख्य सचिव ने बताया कि लद्दाख में प्रशासनिक पुनर्गठन की अधिकांश प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। प्रत्येक जिले में सरकारी विभागों की स्वतंत्र व्यवस्था विकसित की जा रही है।
उपराज्यपाल ने सभी जिलों में लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लिए अलग-अलग इंजीनियरिंग विंग स्थापित करने का फैसला किया है। इन विभागों में अधिकारियों की तैनाती के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि शेष प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी आने वाले सप्ताहों में पूरी कर ली जाएंगी।
लेह और कारगिल जैसी शक्तियां मिलेंगी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नई स्वायत्त हिल विकास परिषदों के अधिकार लेह और कारगिल की परिषदों से कम नहीं होंगे।
लेह स्वायत्त हिल विकास परिषद वर्ष 1995 से काम कर रही है, जबकि कारगिल स्वायत्त हिल विकास परिषद का गठन वर्ष 2003 में किया गया था। अब शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास की परिषदें भी LAHDC अधिनियम के समान प्रावधानों और अधिकारों के तहत कार्य करेंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य लद्दाख के सभी जिलों को समान स्तर की प्रशासनिक स्वायत्तता देना है। किसी जिले को उसके गठन की तारीख या भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम अधिकार नहीं दिए जाएंगे।
भूमि और स्थानीय संसाधनों पर बढ़ेगा नियंत्रण
स्वायत्त हिल विकास परिषदों की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में भूमि के स्वामित्व, उपयोग और आवंटन से जुड़े मामलों में भूमिका शामिल है।
नई परिषदों के गठन के बाद शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास में भूमि से जुड़े फैसलों में स्थानीय निर्वाचित संस्थाओं की सीधी भागीदारी होगी।
लद्दाख में भूमि का मुद्दा केवल प्रशासनिक या आर्थिक विषय नहीं है। यह स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक आजीविका, पर्यावरण संरक्षण, सीमित प्राकृतिक संसाधनों और जनसांख्यिकीय चिंताओं से भी जुड़ा हुआ है।
जिला स्तर पर भूमि से जुड़े अधिकार मिलने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि विकास परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं।
सरकारी नौकरियों और प्रमोशन में भी होगी भूमिका
नई हिल काउंसिलों को जिला कैडर के पदों पर भर्ती और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी भूमिका मिलेगी।
इससे सरकारी नौकरियों से जुड़े फैसले स्थानीय समुदायों और जिला स्तर की प्रशासनिक जरूरतों के करीब आ सकेंगे। परिषदें अपने जिले की आवश्यकताओं के अनुसार कर्मचारियों की तैनाती और वर्कफोर्स प्रबंधन से जुड़े मामलों में भागीदारी कर सकेंगी।
प्रशासन का मानना है कि इससे रोजगार व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। स्थानीय युवाओं की जरूरतों और क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझते हुए भर्ती से जुड़े निर्णय लिए जा सकेंगे।
हर परिषद का होगा अपना काउंसिल फंड
लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद अधिनियम के तहत प्रत्येक नई परिषद को वित्तीय अधिकार भी दिए जाएंगे। हर परिषद का अपना काउंसिल फंड होगा। इसके अलावा कानून के प्रावधानों के अनुसार परिषदों को कुछ टैक्स और फीस एकत्र करने की शक्ति भी मिल सकती है।
वित्तीय स्वायत्तता मिलने से जिलों को स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर विकास योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। उन्हें हर छोटे फैसले के लिए केंद्र शासित प्रदेश स्तर की मंजूरी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे प्रत्येक जिला अपने क्षेत्र की जरूरतों की पहचान कर सकेगा और उपलब्ध संसाधनों का उसी के अनुसार आवंटन कर सकेगा।
हर जिले की जरूरत के अनुसार बनेंगी विकास योजनाएं
लद्दाख लगभग 60 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ विशाल और दुर्गम क्षेत्र है। यहां अलग-अलग जिलों की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और जलवायु संबंधी परिस्थितियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
चांगथांग के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालक समुदायों की समस्याएं शाम के कृषि क्षेत्रों से अलग हैं। इसी तरह जांस्कर की दूरस्थ घाटियों, द्रास के सीमावर्ती क्षेत्रों और पर्यटन आधारित नुब्रा घाटी की आवश्यकताएं भी अलग हैं।
प्रशासन का मानना है कि पूरे लद्दाख के लिए एक समान विकास नीति प्रभावी नहीं हो सकती। हर जिले में निर्वाचित हिल काउंसिल होने से स्थानीय जनप्रतिनिधि अपनी परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं बना सकेंगे। परिषदें यह तय कर सकेंगी कि उनके जिले में सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, पशुपालन या अन्य क्षेत्रों में से किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सार्वजनिक सेवाओं की जिम्मेदारी
स्वायत्त हिल विकास परिषदें विकास योजनाओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी भी करेंगी।
इनमें स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल और शिक्षा व्यवस्था, पर्यटन विकास, स्थानीय सड़कें, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण योजनाएं और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। लद्दाख में कई गांव और बस्तियां अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सरकारी सेवाएं पहुंचाने में कई बार देरी होती है।
निर्णय लेने की शक्ति जिला स्तर पर पहुंचने से स्थानीय समस्याओं का तेजी से समाधान होने की उम्मीद है। निर्वाचित प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
परिसीमन के बाद होगा परिषदों का चुनाव
नई स्वायत्त हिल विकास परिषदों के गठन से पहले निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा। परिसीमन के तहत यह तय होगा कि प्रत्येक परिषद में कितने निर्वाचन क्षेत्र होंगे, उनकी सीमाएं क्या होंगी और किस क्षेत्र से कितने प्रतिनिधि चुने जाएंगे। जहां आवश्यक होगा, वहां LAHDC अधिनियम में संशोधन भी किया जाएगा। कानूनी और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिषदों के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद लद्दाख में निर्वाचित हिल काउंसिलों की संख्या दो से बढ़कर सात हो जाएगी।
केंद्र शासित प्रदेश स्तर के प्रतिनिधि निकाय पर भी विचार
सभी सात जिलों में हिल काउंसिल के गठन की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब लद्दाख की भविष्य की शासन व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच व्यापक चर्चा चल रही है।
केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक प्रतिनिधि निकाय बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इस निकाय को संविधान के अनुच्छेद 371 से जुड़े किसी विशेष ढांचे के तहत विकसित करने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
प्रस्तावित निकाय को विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है।
मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के अनुसार, यह मॉडल देश के अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में लागू व्यवस्था की हूबहू नकल नहीं होगा। अलग-अलग मॉडलों की उपयोगी विशेषताओं को लद्दाख की परिस्थितियों और आकांक्षाओं के अनुसार तैयार किया जाएगा।
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है। आने वाले समय में लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच इस पर आगे चर्चा होगी।
जारी रहेंगी पंचायती राज संस्थाएं
लद्दाख प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वायत्त हिल विकास परिषदों के गठन के बाद मौजूदा पंचायती राज संस्थाएं समाप्त नहीं होंगी। गांव स्तर की पंचायतें पहले की तरह काम करती रहेंगी। जिला स्तर पर हिल काउंसिल पंचायतों के साथ समानांतर रूप से कार्य करेगी। भविष्य में यदि केंद्र शासित प्रदेश स्तर का प्रतिनिधि निकाय भी बनता है, तो लद्दाख में तीन स्तरों वाली निर्वाचित शासन व्यवस्था विकसित हो सकती है।
पहले स्तर पर गांवों में पंचायतें, दूसरे स्तर पर प्रत्येक जिले में स्वायत्त हिल विकास परिषद और तीसरे स्तर पर पूरे लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधि निकाय होगा। इस त्रिस्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य गांव से लेकर पूरे केंद्र शासित प्रदेश तक लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करना होगा।
स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
लेह और कारगिल की स्वायत्त हिल विकास परिषदें पिछले कई दशकों से लद्दाख में स्थानीय शासन की प्रमुख निर्वाचित संस्थाओं के रूप में काम करती रही हैं। अब इसी प्रणाली को शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास तक विस्तारित करने का फैसला पूरे लद्दाख की प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है।
इस फैसले से स्थानीय लोगों को भूमि, सरकारी रोजगार, वित्तीय संसाधनों, सार्वजनिक सेवाओं और विकास योजनाओं पर पहले से अधिक अधिकार मिलने की संभावना है। प्रशासन का उद्देश्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को स्थानीय समुदायों के करीब लाना है, ताकि योजनाएं वास्तविक जरूरतों के आधार पर तैयार की जा सकें।
लद्दाख की शासन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव
सभी सात जिलों में निर्वाचित हिल काउंसिल बनाने का फैसला लद्दाख में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक जिले के लोगों को अपनी निर्वाचित परिषद चुनने का अवसर मिलेगा। परिषदें अपने जिले के विकास, संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
हालांकि परिषदों का वास्तविक गठन कानूनी संशोधन, परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। इसके बावजूद सरकार की औपचारिक घोषणा ने लद्दाख में जिला स्तर पर समान निर्वाचित शासन का रास्ता खोल दिया है।
इस कदम से लद्दाख के सभी क्षेत्रों को अपने भविष्य, संसाधनों और विकास प्राथमिकताओं को तय करने में अधिक प्रभावी भागीदारी मिलने की उम्मीद है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel