उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का भविष्य अब काफी हद तक उसी वरिष्ठ IAS अधिकारी के फैसले पर निर्भर हो सकता है, जिन्हें समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने वर्ष 2019 में सार्वजनिक मंच से ‘तनखैय्या’ कहा था। तत्कालीन रामपुर जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह अब मुरादाबाद मंडल के आयुक्त और रामपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA के अध्यक्ष हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को कथित रूप से मानचित्र स्वीकृत न होने सहित निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया गया है। यदि इस आदेश के खिलाफ अपील की जाती है, तो मामले की सुनवाई RDA अध्यक्ष के रूप में आन्जनेय कुमार सिंह के सामने आ सकती है। ऐसे में लगभग सात साल पुराने राजनीतिक टकराव के बाद परिस्थितियों ने दिलचस्प मोड़ ले लिया है।
जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर बुलडोजर का खतरा
रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद 40 भवनों में से 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सामने भवनों के नक्शे नियमित कराने, ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील करने या न्यायालय की शरण लेने जैसे विकल्प मौजूद हैं। हालांकि अंतिम फैसला संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
आजम खान ने आन्जनेय सिंह को कहा था ‘तनखैय्या’
वर्ष 2019 में आन्जनेय कुमार सिंह रामपुर के जिलाधिकारी थे। उस दौरान आजम खान और जिला प्रशासन के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखा टकराव देखने को मिला था। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आजम खान ने आन्जनेय कुमार सिंह को ‘तनखैय्या’ कहा था और उनके खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी।
अब आन्जनेय कुमार सिंह मुरादाबाद मंडल के आयुक्त होने के साथ रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। यदि जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ प्राधिकरण में अपील करता है, तो उसकी सुनवाई उनके समक्ष हो सकती है।
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि जिस अधिकारी को कभी आजम खान ने निशाने पर लिया था, आज उसी अधिकारी की अध्यक्षता वाला प्राधिकरण यूनिवर्सिटी से संबंधित महत्वपूर्ण फैसला कर सकता है।
जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सक्रिय हुई समाजवादी पार्टी
ध्वस्तीकरण की आशंका के बीच रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने रामपुर पहुंचकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही है।
मोहिबुल्लाह नदवी के अनुसार, वह रामपुर में हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र है और इसे बचाने के लिए सामाजिक तथा कानूनी स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने नोटिस वापस लेने की मांग की
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस पर आपत्ति जताई है। बोर्ड ने कार्रवाई को कथित रूप से अन्यायपूर्ण बताते हुए प्रशासन से नोटिस वापस लेने की मांग की है।
बोर्ड का कहना है कि इस मामले में शिक्षा संस्थान और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि प्रशासन की ओर से कार्रवाई को भवन निर्माण और विकास प्राधिकरण के नियमों से जुड़ा मामला बताया जा रहा है।
भवनों को नियमित कराने में आ सकता है 100 करोड़ से अधिक का खर्च
मामले से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के नक्शे कंपाउंडिंग के माध्यम से नियमित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आ सकता है।
हालांकि यह कोई आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं है। यह राशि विकास शुल्क, लेबर सेस, कंपाउंडिंग फीस, इम्पैक्ट फीस और अन्य संभावित शुल्कों को जोड़कर किए गए आकलन पर आधारित बताई जा रही है। वास्तविक शुल्क का निर्धारण भवनों के क्षेत्रफल, निर्माण की प्रकृति और लागू नियमों के आधार पर होगा।
आजम खान के सामने कौन से तीन विकल्प?
कानूनी जानकारों के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए फिलहाल तीन प्रमुख विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
1. RDA में कंपाउंडिंग के लिए आवेदन
यूनिवर्सिटी प्रबंधन रामपुर विकास प्राधिकरण में आवेदन देकर 38 इमारतों के नक्शों को कंपाउंडिंग के माध्यम से नियमित कराने का प्रयास कर सकता है। इसके लिए विकास शुल्क, कंपाउंडिंग फीस, इम्पैक्ट फीस और अन्य निर्धारित शुल्क जमा करने पड़ सकते हैं।
हालांकि यह भी जांचा जाएगा कि संबंधित निर्माण कंपाउंडिंग योग्य हैं या नहीं। नियमों के खिलाफ बने प्रत्येक निर्माण को केवल जुर्माना भरकर नियमित नहीं कराया जा सकता।
2. हाईकोर्ट में याचिका
दूसरा विकल्प इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने और प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा के लिए याचिका दाखिल कर सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विवाद भवनों के नक्शे और उनके नियमितीकरण से जुड़ा है, तो अंतिम प्रक्रिया रामपुर विकास प्राधिकरण के स्तर पर ही पूरी करनी पड़ सकती है।
3. कमिश्नर और RDA अध्यक्ष के सामने अपील
तीसरा विकल्प मुरादाबाद मंडल के आयुक्त और RDA अध्यक्ष आन्जनेय कुमार सिंह के समक्ष अपील करना है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन उनसे ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने और अपना पक्ष रखने के लिए समय देने का अनुरोध कर सकता है।
नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद प्राधिकरण अपील स्वीकार करने, राहत देने या ध्वस्तीकरण आदेश को बरकरार रखने का निर्णय कर सकता है।
प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें
जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों में रही है। अब 38 इमारतों को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि आजम खान को राहत के लिए उसी अधिकारी की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण के सामने जाना पड़ सकता है, जिन्हें उन्होंने वर्ष 2019 में ‘तनखैय्या’ कहा था।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन कौन सा कानूनी विकल्प चुनता है और रामपुर विकास प्राधिकरण इस मामले में क्या निर्णय लेता है।
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