NEET पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान जंतर-मंतर पर हुई हिंसक झड़प को लेकर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान प्रदर्शन में घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिजनों को भी मीडिया के सामने लाया गया। परिजनों ने दावा किया कि प्रदर्शन केवल छात्रों तक सीमित नहीं था और भीड़ में कई असामाजिक तथा हिंसक तत्व शामिल हो गए थे।
पुलिसकर्मियों के परिवारों ने बताया कि झड़प के दौरान जवानों पर पत्थर, गमले, चप्पल और जूते फेंके गए। कुछ प्रदर्शनकारियों पर संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया गया।
घायल SI की बेटी ने सुनाई हमले की कहानी
हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने बताया कि उनके पिता पुलिस सेवा में आने से पहले भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं। उन्होंने करीब 15 वर्षों तक इंडियन नेवी में सेवा दी थी।
बेटी के अनुसार, उनके पिता प्रदर्शन स्थल पर बैरिकेड्स के पास अग्रिम पंक्ति में तैनात थे। वह घर लौटने के बाद परिवार से कहा करते थे कि प्रदर्शन अब केवल छात्रों का आंदोलन नहीं लग रहा था और इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो चुके थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसक भीड़ ने उनके पिता को घसीटकर जंतर-मंतर के मंच के पास ले जाने और पीट-पीटकर मारने की कोशिश की। गंभीर चोट लगने के बाद वह करीब चार घंटे तक राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बेहोश रहे।
रात करीब 10 बजे उनके साथी उन्हें घर लेकर पहुंचे। उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। बेटी ने कहा कि अपने पिता को उस हालत में देखना पूरे परिवार के लिए बेहद दर्दनाक था।
हालांकि, परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम में विरोध-प्रदर्शन की तारीख को लेकर अलग-अलग उल्लेख सामने आए हैं। मुख्य प्रदर्शन 20 जुलाई को बताया गया, जबकि घायल SI की बेटी के बयान में 25 जुलाई को हमले का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस तारीख संबंधी अंतर पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
#WATCH | Delhi | Daughter of a Delhi Police SI (Sub-Inspector) who sustained injuries during the clash between Police and protesters in Delhi, says, "…Before joining the police, my father served as a Marine Commando in the Indian Navy. He dedicated 15 years of his life to the… pic.twitter.com/aevnbcdNyQ
— ANI (@ANI) July 31, 2026
सोशल मीडिया पर पिता को अपराधी बताए जाने से दुखी हुई बेटी
घायल पुलिसकर्मी की बेटी ने कहा कि घटना के बाद जब उन्होंने सोशल मीडिया देखा तो उनके पिता को ही अपराधी बताया जा रहा था। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले लोग अपने खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए अदालत पहुंचे और घायल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराईं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने पिता के लिए न्याय मांगने का निर्णय लिया। अन्य पुलिस परिवारों के समर्थन से वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और एक वकील से उनका पक्ष रखने का अनुरोध किया।
बेटी के मुताबिक, वकील ने उन्हें भरोसा दिलाया कि देश के नागरिक होने के नाते पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को भी समान अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
#WATCH | Delhi | Wife of a Delhi Police ACP, who sustained injuries during the clash between Police and CJP protesters in Delhi on 20th July says, "The moment he returned home late on the night of July 20, injured as he was, was incredibly painful and traumatic for both me and my… pic.twitter.com/lI40EMWnRI
— ANI (@ANI) July 31, 2026
घायल ASI की पत्नी बोलीं- 33 वर्षों से पुलिस में सेवा दे रहे हैं पति
दिल्ली पुलिस के एक घायल असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने बताया कि उनके पति पिछले 33 वर्षों से दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कॉन्स्टेबल के पद से नौकरी शुरू की थी और वर्तमान में ASI के पद पर तैनात हैं।
पत्नी के अनुसार, 20 जुलाई को उनके पति हमेशा की तरह जंतर-मंतर पर ड्यूटी के लिए निकले थे। सुबह करीब 11 बजे उन्होंने फोन कर बताया था कि प्रदर्शन स्थल पर भारी भीड़ जमा है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे हैं।
शाम को परिवार को पता चला कि घायल पुलिसकर्मी को इलाज के लिए लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घायल ASI ने अपने परिवार को बताया कि भीड़ अचानक उग्र हो गई थी। कुछ शरारती तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, गमले, जूते और चप्पल फेंकने शुरू कर दिए थे। भीड़ ने संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड भी तोड़ दिए थे।
सिर में लगी चोट, चार टांके आए
घायल ASI के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके पिता को अपने पुलिस करियर में बहादुरी के लिए चार सम्मान मिल चुके हैं। उनके दादा सीमा सुरक्षा बल में कार्यरत थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था।
लक्ष्य के अनुसार, उनके पिता को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान फ्रंटलाइन पर तैनात किया गया था। उन्हें पिता के एक सहकर्मी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है।
जब उन्होंने पिता की तस्वीर देखी तो उनका सिर मुंडा हुआ था और चोट के कारण चार टांके लगे थे।
लक्ष्य ने कहा कि पिता ने घर लौटने के बाद बताया कि प्रदर्शन केवल छात्रों तक सीमित नहीं था। भीड़ में कुछ उपद्रवी और आक्रामक लोग भी शामिल हो गए थे। जब पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी उनके पिता के सिर पर पत्थर लगा।
#WATCH | Delhi | A family member of a Delhi Police official who sustained injuries during the clash between Police and protesters in Delhi, says, "This was not a student protest; rather, there were mischievous elements who tried to sabotage and discredit the students' protest and… pic.twitter.com/qfyP8CawD4
— ANI (@ANI) July 31, 2026
पुलिस परिवारों ने उपद्रवियों पर कार्रवाई की मांग की
घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने कहा कि छात्रों की वास्तविक मांगों और हिंसा करने वाले तत्वों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के रिकॉर्ड और भूमिका की जांच करने के बाद निर्दोष छात्रों को छोड़ दिया जाना चाहिए। वहीं, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, संसद की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और आंदोलन को हिंसक बनाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक घायल अधिकारी के परिवार ने कहा कि यह केवल छात्रों का विरोध-प्रदर्शन नहीं रह गया था। कुछ शरारती तत्वों ने आंदोलन को बदनाम करने और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की।
परिवार ने मांग की कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के अनुसार सजा दी जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच जारी
जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और बल प्रयोग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस पर कार्रवाई के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस और घायल जवानों के परिवारों का कहना है कि भीड़ में शामिल कुछ तत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा की।
मामला अदालत तक पहुंच चुका है। ऐसे में घटना से जुड़े वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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