अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता तैयार किया है। ट्रंप ने इसे मध्य पूर्व में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
हालाँकि, इस घोषणा के बावजूद समझौते के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं। इजरायल ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है और निरस्त्रीकरण तथा इजरायली सेना की वापसी के क्रम को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग-अलग बताई जा रही है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सभी हथियारबंद समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता किया है।
ट्रंप ने इसे स्थायी शांति की दिशा में “अत्यंत महत्वपूर्ण कदम” बताते हुए कहा कि प्रस्ताव लागू होने के बाद गाजा पर हमास का शासन समाप्त हो जाएगा। गाजा का प्रशासन एक नई फिलिस्तीनी सरकार को सौंपे जाने की योजना है, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर काम करेगी।
ट्रंप के मुताबिक, नई प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य गाजा के नागरिकों को स्थिर शासन उपलब्ध कराना और इजरायल को सुरक्षा की गारंटी देना है। प्रस्ताव में यह सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है कि भविष्य में गाजा की जमीन का इस्तेमाल इजरायल पर हमले करने के लिए न हो।
Today, the Board of Peace reached a HISTORIC agreement for the COMPLETE DISARMAMENT of Hamas and all other armed groups in Gaza. This is a monumental step toward lasting PEACE and SECURITY.
This agreement is a critical step towards Gaza finally being governed by a new… pic.twitter.com/UeFo8m9tii
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) July 30, 2026
कई चरणों में होगा हमास का निरस्त्रीकरण
प्रस्तावित योजना को एक साथ लागू करने के बजाय अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। जैसे-जैसे हमास और दूसरे हथियारबंद संगठनों के निरस्त्रीकरण की पुष्टि होगी, उसी अनुपात में इजरायली रक्षा बल यानी IDF गाजा से पीछे हटना शुरू करेंगे।
इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल और नई फिलिस्तीनी पुलिस को सौंपे जाने का प्रस्ताव है। इस सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य गाजा के नागरिकों और पड़ोसी क्षेत्रों को हिंसा तथा सशस्त्र हमलों से सुरक्षित रखना होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, योजना में हमास के रॉकेट, भारी हथियार, हथियार डिपो, सुरंगों और दूसरे सैन्य ढाँचों को चरणबद्ध तरीके से नष्ट या नियंत्रण में लेने का प्रावधान शामिल है। इस प्रक्रिया में लगभग 200 से 350 दिन लगने का अनुमान बताया गया है, लेकिन अभी कोई अंतिम और बाध्यकारी समय-सीमा सार्वजनिक नहीं हुई है।
नई फिलिस्तीनी सरकार संभालेगी गाजा का प्रशासन
ट्रंप की योजना के अनुसार, निरस्त्रीकरण के बाद हमास को गाजा के प्रशासन से अलग कर दिया जाएगा। उसकी जगह एक तकनीकी या अंतरिम फिलिस्तीनी सरकार प्रशासन संभालेगी।
यह सरकार स्थानीय नागरिक सेवाओं, कानून-व्यवस्था, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के वितरण का काम देखेगी। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को संक्रमणकालीन व्यवस्था, पुनर्निर्माण और वित्तीय सहयोग की निगरानी से जोड़ा गया है।
‘Trump 20-Point Plan’ का अहम हिस्सा
डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम को अपने ‘20-पॉइंट गाजा पीस प्लान’ को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
इस व्यापक योजना में गाजा युद्ध समाप्त करना, हमास का निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था और गाजा का बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण शामिल है।
इससे पहले पेश की गई योजना में भी गाजा के शासन को एक फिलिस्तीनी तकनीकी निकाय को सौंपने और अंतरराष्ट्रीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ द्वारा संक्रमणकालीन निगरानी की बात कही गई थी।
मिस्र, कतर और तुर्किये को दिया श्रेय
ट्रंप ने इस समझौते तक पहुँचने के लिए मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन देशों ने संबंधित पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने और मतभेद कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने अमेरिकी वार्ता दल और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से जुड़े अधिकारियों की भी प्रशंसा की। Reuters के अनुसार, ट्रंप ने अपनी घोषणा में विशेष रूप से मिस्र, कतर और तुर्किये का आभार व्यक्त किया।
ट्रंप बोले—7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा नहीं होने देंगे
ट्रंप ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजरायल पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में गाजा से ऐसा खतरा दोबारा पैदा नहीं होने दिया जाएगा।
उनका कहना है कि नई सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने के बाद गाजा का संचालन नागरिक जरूरतों के लिए किया जाएगा, न कि किसी सशस्त्र या आतंकवादी गतिविधि के केंद्र के रूप में।
क्या हमास ने समझौता स्वीकार कर लिया है?
हमास की स्थिति को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। AP की रिपोर्ट के अनुसार, हमास के एक अधिकारी ने निरस्त्रीकरण की शर्तों पर सहमति की पुष्टि की, लेकिन यह प्रक्रिया इजरायली सेना की वापसी सहित कई शर्तों से जुड़ी हुई है। दूसरी रिपोर्टों में हमास की ओर से हथियार सौंपने की व्याख्या और प्रक्रिया पर मतभेद बताए गए हैं।
हमास का रुख कथित रूप से यह है कि निरस्त्रीकरण तभी आगे बढ़ सकता है, जब इजरायल भी गाजा से अपनी सेना हटाने की ठोस प्रक्रिया शुरू करे। यही शर्त आगे की बातचीत में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन सकती है।
इजरायल की सार्वजनिक मंजूरी अभी नहीं
इजरायल ने ट्रंप के ऐलान के बाद भी प्रस्ताव पर तत्काल सार्वजनिक और औपचारिक स्वीकृति नहीं दी है। इजरायली पक्ष हमास के सैन्य ढाँचे, सुरंगों, रॉकेट क्षमता और हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने की गारंटी चाहता है।
AP के अनुसार, इजरायल वार्ता प्रक्रिया से जुड़ा रहा है, लेकिन समझौते के क्रियान्वयन और हमास की प्रतिबद्धता को लेकर अब भी संदेह बना हुआ है।
दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवाद इस बात पर हो सकता है कि पहले हमास हथियार छोड़ेगा या पहले इजरायली सेना पीछे हटेगी। इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण को सेना की वापसी से पहले की शर्त मान सकता है, जबकि हमास दोनों प्रक्रियाओं को साथ-साथ या इजरायली वापसी से जोड़ना चाहता है।
ऐतिहासिक घोषणा, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की
ट्रंप की घोषणा गाजा शांति प्रक्रिया में एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम है, लेकिन इसे अंतिम शांति समझौता मानना अभी जल्दबाजी होगी।
निरस्त्रीकरण की निगरानी कौन करेगा, हथियार कैसे जमा किए जाएंगे, सुरंगों को कैसे नष्ट किया जाएगा, इजरायली सेना कब और किन क्षेत्रों से हटेगी तथा नई फिलिस्तीनी सरकार को कितनी स्वीकार्यता मिलेगी—इन सभी प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर अभी सामने आने बाकी हैं।
इसलिए फिलहाल इसे एक प्रस्तावित और चरणबद्ध समझौते के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी सफलता इजरायल, हमास, फिलिस्तीनी प्रशासन, क्षेत्रीय मध्यस्थों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल के सहयोग पर निर्भर करेगी।
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