देश में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने वाले संगठित गिरोहों पर अब पहले से कहीं अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन गया है।
नए कानून में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जाँच और सुनवाई को समयबद्ध बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जाँच दो महीने में पूरी करने, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में रोजाना सुनवाई कराने और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार संगठित रूप से पेपर लीक कराने वाले दोषियों को सात से दस साल तक की जेल और कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना हो सकता है। वहीं, किसी व्यक्ति द्वारा परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर पाँच से दस साल तक की सजा और अधिकतम ₹50 लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून हुआ और सख्त
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा ने 29 जुलाई और राज्यसभा ने 30 जुलाई 2026 को पारित किया था। संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।
राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ ही सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और तकनीकी माध्यमों से होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ कानून का दायरा और सख्त हो गया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक करने वाले पूरे नेटवर्क को समाप्त करना और परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता बढ़ाना है।
पेपर लीक कानून 2026 में सजा के नए प्रावधान
संशोधित कानून में अलग-अलग अपराधों और आरोपियों के लिए अलग-अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
1. किसी व्यक्ति द्वारा अनुचित साधनों का इस्तेमाल
परीक्षा में पेपर लीक, उत्तर उपलब्ध कराने या अन्य अनुचित गतिविधि में शामिल व्यक्ति को अब पाँच से दस साल तक की जेल हो सकती है। ऐसे मामलों में अधिकतम ₹50 लाख का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
इससे पहले 2024 के कानून में तीन से पाँच साल तक की जेल और अधिकतम ₹10 लाख के जुर्माने का प्रावधान था।
2. परीक्षा सेवा प्रदाता पर कार्रवाई
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या सेवा प्रदाता के अनुचित साधनों में शामिल पाए जाने पर अधिकतम ₹5 करोड़ का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पहले ऐसे सेवा प्रदाताओं पर अधिकतम ₹1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान था।
3. सेवा प्रदाता के प्रभारी व्यक्ति की जिम्मेदारी
किसी परीक्षा सेवा प्रदाता के प्रभारी अधिकारी या व्यक्ति के पेपर लीक अथवा परीक्षा में गड़बड़ी में शामिल पाए जाने पर कम से कम पाँच साल की जेल और ₹5 करोड़ का जुर्माना हो सकता है।
4. संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सबसे कठोर कार्रवाई
संगठित अपराध के रूप में पेपर लीक कराने वाले गिरोहों, संस्थाओं या नेटवर्क से जुड़े दोषियों को सात से दस साल तक की जेल हो सकती है।
ऐसे मामलों में कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। पुराने कानून में संगठित अपराध के लिए पाँच से दस साल की सजा और कम से कम ₹1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान था।
हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट
नए कानून के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को एक सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करना होगा।
ये अदालतें पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। इससे जुड़े भारतीय न्याय संहिता या अन्य कानूनों के अपराधों की सुनवाई भी उसी ट्रायल में की जा सकेगी।
हर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए जाएंगे। कानून के तहत पहले से लंबित मामलों को भी इन अदालतों में स्थानांतरित किया जाएगा।
रोजाना सुनवाई और तीन महीने में ट्रायल
पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर की जाएगी। अदालत को उपस्थित गवाहों की जाँच लगातार पूरी करनी होगी।
जरूरी स्थिति में सुनवाई स्थगित की जा सकेगी, लेकिन अदालत को इसका कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा।
आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रावधान है। पहले से लंबित और फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित मामलों का ट्रायल भी स्थानांतरण की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
दो महीने में पूरी करनी होगी जाँच
2024 के कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जाँच पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी।
संशोधित कानून के अनुसार जाँच एजेंसी को दो महीने के भीतर जाँच पूरी करनी होगी। केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जाँच के लिए विशेष कार्यबल यानी स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी दिया गया है।
स्पेशल टास्क फोर्स करेगी पेपर लीक मामलों की जाँच
पुराने कानून में केंद्र सरकार किसी मामले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी को सौंप सकती थी। नए संशोधन के तहत केंद्र सरकार पेपर लीक और परीक्षा में संगठित गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जाँच के लिए अलग स्पेशल टास्क फोर्स बना सकेगी।
इसका उद्देश्य पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया, कोचिंग संस्थानों, अधिकारियों और तकनीकी सहयोगियों के बीच संभावित गठजोड़ की तेजी से जाँच करना है।
दोषी सेवा प्रदाता आठ साल तक रहेगा प्रतिबंधित
2024 के कानून में परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले सेवा प्रदाता को चार साल तक सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी नहीं दिए जाने का प्रावधान था।
संशोधित कानून में इस प्रतिबंध की अवधि को बढ़ाकर आठ साल कर दिया गया है। यानी दोषी एजेंसी आठ वर्षों तक किसी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन का काम हासिल नहीं कर सकेगी।
हाई कोर्ट में होगी अपील
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ संबंधित हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ के समक्ष अपील की जा सकेगी।
अपील फैसले के 30 दिनों के अंदर दाखिल करनी होगी। पर्याप्त कारण होने पर हाई कोर्ट देरी स्वीकार कर सकता है, लेकिन सामान्यतः 90 दिनों के बाद अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।
अपील का निपटारा भी जहाँ तक संभव हो, दाखिला स्वीकार होने के तीन महीने के भीतर किया जाएगा।
किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून?
यह कानून केंद्र सरकार की अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न परीक्षाएँ और संस्थाएँ शामिल हैं:
- संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC
- कर्मचारी चयन आयोग यानी SSC
- रेलवे भर्ती बोर्ड यानी RRB
- इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनेल सिलेक्शन यानी IBPS
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA
- केंद्र सरकार के मंत्रालयों और संबंधित कार्यालयों की भर्ती परीक्षाएँ
- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षा संस्थाएँ
इसके दायरे में NEET, JEE और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएँ भी आ सकती हैं, क्योंकि इनका संचालन NTA करता है।
सरकार ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा कि सख्त दंड और समयबद्ध जाँच तथा सुनवाई के प्रावधान परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत करेंगे।
सरकार का दावा है कि नया कानून मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करेगा और परीक्षा माफिया तथा संगठित पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ मजबूत कानूनी हथियार साबित होगा।
छात्रों और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर?
नए कानून में सामान्य परीक्षार्थियों की जगह मुख्य रूप से पेपर लीक कराने वाले व्यक्तियों, सेवा प्रदाताओं, अधिकारियों और संगठित गिरोहों को निशाना बनाया गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट, दो महीने की जाँच सीमा और तीन महीने की ट्रायल अवधि से मामलों में शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद है। हालांकि कानून की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जाँच एजेंसियाँ, राज्य सरकारें और परीक्षा संस्थान इन प्रावधानों को कितनी सख्ती से लागू करते हैं।
निष्कर्ष
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन कानून, 2026 पेपर लीक और परीक्षा माफिया के खिलाफ देश के सबसे कठोर कानूनों में से एक बन गया है।
व्यक्तिगत अपराध के लिए दस साल तक की जेल, संगठित अपराध पर कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना, दो महीने में जाँच, तीन महीने में ट्रायल और आठ साल तक सेवा प्रदाताओं पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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