देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने महाराष्ट्र के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि बड़ी कुर्बानियों के बाद मिली आजादी को सुरक्षित और कायम रखना प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है।
1857 से आजादी तक के संघर्ष को किया याद
मोहन भागवत ने कहा कि अगर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश को आजादी मिलने तक के कालखंड को देखा जाए तो करीब 90 वर्षों तक देशवासियों ने अलग-अलग तरीकों से संघर्ष किया और अनेक लोगों ने बलिदान दिया। लंबे संघर्ष और त्याग के बाद भारत को स्वतंत्रता मिली।
उन्होंने कहा कि इतने त्याग और बलिदान से हासिल हुई स्वतंत्रता को केवल उत्सव के रूप में मनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित और अक्षुण्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी भी देश के नागरिकों की है।
आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागपुर स्थित महाल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ध्वजारोहण किया। pic.twitter.com/7vgZGnuP0F
— RSS (@RSSorg) August 15, 2026
सावरकर का उल्लेख कर बताया आजादी के बाद का दायित्व
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का भी उल्लेख किया। भागवत ने उनके विचार का संदर्भ देते हुए कहा कि स्वतंत्रता मिलने के बाद देश में जो उत्तम, महान और श्रेष्ठ है, उसे साकार करने का दायित्व भी नागरिकों का है।
भागवत ने कहा कि भारत स्वतंत्र हो चुका है और उसकी स्वतंत्रता बनी रहेगी, लेकिन देश को अधिक मजबूत, सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल बनाने का कार्य अभी जारी है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
“स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए गौरव का और उत्सव का विषय़ है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 वर्ष अनेक प्रकार का त्याग बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने स्वातंत्र्य की प्राप्ति की। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है। लेकिन इसके साथ एक भान मन में चाहिए, कि इतना त्याग-परिश्रम करके… pic.twitter.com/1s5t2Jrz3C
— RSS (@RSSorg) August 15, 2026
तिरंगे के तीन रंगों का समझाया महत्व
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने केसरिया रंग को कर्मशीलता, ज्ञान, त्याग और बलिदान से जोड़ा, जबकि सफेद रंग को शांति और शीतलता का प्रतीक बताया। उन्होंने हरे रंग को समृद्धि से जोड़ा।
भागवत ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भारत की विविधता उसकी एकता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने तिरंगे के मध्य स्थित चक्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी अलग-अलग तीलियां एक ही केंद्र से जुड़ी होती हैं। इसी प्रतीक के माध्यम से उन्होंने विविधता के बीच एकता और मर्यादा का संदेश दिया।
‘देश को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना है’
मोहन भागवत ने कहा कि भारत स्वतंत्र है और स्वतंत्र रहेगा, लेकिन देश को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाने के रास्ते में कई चुनौतियां सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतें भी मौजूद हैं जो भारत के इस लक्ष्य के रास्ते में बाधा डाल सकती हैं। इन परिस्थितियों का सामना करते हुए देश को अपने मूल विचारों और सिद्धांतों से समझौता किए बिना आगे बढ़ना होगा।
भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का लक्ष्य
RSS प्रमुख ने भारत को विश्वगुरु बनाने की बात भी कही। उनके मुताबिक भारत की प्रगति का उद्देश्य केवल अपनी आर्थिक या सामरिक शक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारत को ऐसा राष्ट्र बनना चाहिए जो विश्व और पूरी मानवता के लिए सार्थक योगदान दे सके।
भागवत ने लोगों से देश को खुशहाल, समृद्ध और सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि भारत को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय एकता, जिम्मेदारी और मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।
स्वतंत्रता दिवस पर मोहन भागवत का संदेश मुख्य रूप से आजादी के लिए दिए गए बलिदानों को याद करने, स्वतंत्रता की रक्षा करने और भारत को मजबूत, समृद्ध तथा वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की सामूहिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।
.
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel