प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का नया विकास मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब अपनी सोच, काम करने के तरीके और विकास की गति को बड़े स्तर पर बदलना होगा। उनका लक्ष्य है कि जिन उपलब्धियों तक पहुंचने में पहले कई दशक लगे या जो लक्ष्य अधूरे रहे, उन्हें आने वाले पांच से सात वर्षों में तेज गति से हासिल किया जाए। प्रधानमंत्री ने ‘सप्तधारा’ के तहत मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कृषि, टेक्नोलॉजी, बुनियादी ढांचे, रक्षा, ग्रीन-ब्लू इकॉनमी और भारत की सॉफ्ट पावर तक सात प्रमुख क्षेत्रों को देश की भावी ताकत के रूप में सामने रखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा का प्रमुख आधार बताते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा जाएगा। इसके साथ ही अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।
क्या है PM Modi की ‘शक्ति की सप्तधारा’?
प्रधानमंत्री ने भारत को ‘सप्त सिंधु की सभ्यता’ बताते हुए भविष्य के विकास के लिए सात शक्तियों की अवधारणा रखी। उनका कहना था कि इन्हीं सात धाराओं की सामूहिक ताकत भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ा सकती है।
1. मैन्युफैक्चरिंग पावर: सप्तधारा की पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत को केवल तैयार उत्पादों की असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे कलपुर्जों से लेकर बड़े और जटिल उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन देश में विकसित करनी होगी। डिजाइन से लेकर निर्माण तक भारत को वैश्विक केंद्र और भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के पैमाने को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई गई।
2. कृषि और फूड प्रोसेसिंग: दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को बताया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों और खुलते वैश्विक बाजारों के बीच भारत के कृषि उत्पादों के सामने नए अवसर पैदा हो रहे हैं। भारतीय मसालों, मिलेट्स और अन्य कृषि उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाने तथा फूड प्रोसेसिंग के जरिए किसानों के उत्पादों का मूल्य बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा।
3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है। AI, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भारत को वैश्विक इनोवेशन हब बनाने की बात कही गई। UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की उपलब्धियों का हवाला देते हुए अगली पीढ़ी की तकनीकों में भी नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया गया।
4. गति-शक्ति और तेज कनेक्टिविटी: चौथी शक्ति ‘गति-शक्ति’ है। इसके तहत हाई-स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, एयरपोर्ट, इनलैंड वॉटरवे, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाह आधारित विकास को मजबूत करने की बात सामने रखी गई। उद्देश्य देश के भीतर लोगों और माल की आवाजाही को अधिक तेज, सस्ता और निर्बाध बनाना है।
5. रक्षा शक्ति: पांचवीं धारा रक्षा उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने भारत को रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ भविष्य में एक बड़े वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के तौर पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा। ड्रोन तथा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों में घरेलू क्षमताओं को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
6. ग्रीन और ब्लू इकॉनमी: छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकॉनमी है। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता विकसित करने की बात कही। इसके साथ समुद्री अर्थव्यवस्था के तहत मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और ओशन टेक्नोलॉजी में मौजूद संभावनाओं को भी भारत के भविष्य के विकास से जोड़ा गया।
7. भारत की सॉफ्ट पावर: सप्तधारा की सातवीं शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य, भारतीय संस्कृति, पर्यटन, फिल्म, VFX, गेमिंग और क्रिएटिव इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों के जरिए दुनिया में भारत की सांस्कृतिक और रचनात्मक पहचान को और मजबूत करने की बात कही गई।
1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग, छात्रों को फ्री ऑनलाइन कोचिंग
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को लेकर अपने संबोधन में दो अहम घोषणाएं कीं। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स में प्रशिक्षित करने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही गई। सरकार की यह पहल डिजिटल स्किलिंग और शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की व्यापक रणनीति से जुड़ी है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को एक साथ जोड़कर विकसित भारत के लक्ष्य में लगाने की बात कही। उनके अनुसार आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी और रोजगार की प्रकृति तेजी से बदलेगी, इसलिए भारतीय युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक होगा।
परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री के संबोधन में ऊर्जा सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रही। AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर जैसी नई तकनीकों के विस्तार के साथ बिजली की मांग बढ़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने परमाणु ऊर्जा की भूमिका पर जोर दिया। भारत सरकार का आधिकारिक लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित स्वदेशी 500 MWe Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की थी। यह भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के भाषण में इस दशक के भीतर पांच नए परमाणु रिएक्टरों को परिचालन में लाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
सरकार ने SHANTI Act, 2025 के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक भागीदारी के लिए नया कानूनी ढांचा भी बनाया है। जुलाई 2026 में परमाणु ऊर्जा विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका संबंध 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करने के Nuclear Energy Mission से है।
नोट: उपलब्ध आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों के अनुसार भारत का घोषित दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा लक्ष्य 2047 तक 100 GW है। कुछ शुरुआती मीडिया लाइव अपडेट्स में भाषण के दौरान “200 GW” का उल्लेख रिपोर्ट हुआ है, लेकिन सरकार के आधिकारिक Nuclear Energy Mission और संसदीय जानकारी में लक्ष्य 100 GW दर्ज है।
पिछली सरकारों पर PM Modi का निशाना
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछले 10-12 वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश के सामने केवल संसाधनों की कमी चुनौती नहीं होती, बल्कि सीमित सोच भी विकास की रफ्तार को रोक सकती है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती नीतिगत दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए मौजूदा सरकार के आत्मनिर्भरता, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास के मॉडल को आगे रखा।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कृषि, तकनीक, रक्षा और सॉफ्ट पावर तक सभी क्षेत्रों की ताकत को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। ‘शक्ति की सप्तधारा’ को इसी व्यापक रणनीति की रूपरेखा के तौर पर पेश किया गया।
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