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Saturday, October 31, 2026

6 राज्यों में बनी सहमति, ₹15 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट का रास्ता साफ; यमुना को मिलेगा नया जीवन

6 राज्यों में बनी सहमति, ₹15 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट का रास्ता साफ; यमुना को मिलेगा नया जीवन

लंबे समय से अटके किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इस सहमति के बाद करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस बहुउद्देशीय परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किए जाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

यह घटनाक्रम अमित शाह की अध्यक्षता में 16 जून को हुई बैठक के करीब तीन महीने बाद सामने आया है। उस बैठक में छह राज्यों ने परियोजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। अब राज्यों के बीच प्रमुख लंबित मुद्दों पर सहमति बनने से प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ गई है।

अमित शाह की अध्यक्षता में 6 राज्यों की अहम बैठक

किशाऊ डैम प्रोजेक्ट को लेकर हुई बैठक में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं शामिल हुए। संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन समेत गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य लंबे समय से लंबित अंतर-राज्यीय मुद्दों का समाधान निकालना और परियोजना को मंजूरी के अगले चरण तक पहुंचाना था। अब सहमति के बाद परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखे जाने की उम्मीद है।

क्या है किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट?

किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट टोंस नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी बहुउद्देशीय जल भंडारण और जलविद्युत परियोजना है। टोंस यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है।

इस परियोजना के तहत किशाऊ जलाशय में बड़े पैमाने पर पानी का भंडारण किया जाएगा। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए करने की योजना है।

परियोजना से यमुना नदी में अतिरिक्त साफ पानी का प्रवाह बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसी वजह से इसे यमुना के पुनर्जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी देखा जा रहा है।

वर्षों से क्यों अटका हुआ था किशाऊ डैम प्रोजेक्ट?

किशाऊ परियोजना लंबे समय से विचाराधीन है। इसका एक बड़ा कारण परियोजना में कई राज्यों का शामिल होना और उनके बीच पानी, बिजली तथा लागत के बंटवारे से जुड़े मुद्दे रहे हैं।

इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सीधे जुड़े हैं। इतने राज्यों के हित शामिल होने की वजह से पानी के आवंटन, बिजली उत्पादन और वित्तपोषण पर सर्वसम्मति बनाना महत्वपूर्ण था।

नई सहमति को इन्हीं अंतर-राज्यीय मुद्दों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रोजेक्ट की 90% जल घटक लागत उठाएगा केंद्र

राज्यों के बीच बनी सहमति के मुताबिक किशाऊ परियोजना के जल घटक (Water Component) की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। बाकी 10 प्रतिशत लागत परियोजना में शामिल छह राज्यों के बीच बांटी जाएगी।

इस फंडिंग मॉडल से राज्यों पर परियोजना का वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है। बड़े जल संसाधन प्रोजेक्ट में लागत का बंटवारा लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

हिमाचल के पानी को लेकर भी बनी सहमति

बैठक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी से जुड़े एक महत्वपूर्ण लंबित मुद्दे का समाधान निकालने पर भी सहमति बनी है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार हिमाचल प्रदेश के आवंटित पानी का हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान परियोजना के बिजली उत्पादन वाले हिस्से में हिमाचल प्रदेश की लागत के हिस्से को आपस में बांटेंगे।

इस व्यवस्था को परियोजना से जुड़े प्रमुख अंतर-राज्यीय विवादों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हरियाणा को 836 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद

करीब 15 हजार करोड़ रुपये की परियोजना से विभिन्न राज्यों और दिल्ली को अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध विवरण के अनुसार हरियाणा को सबसे ज्यादा 836 क्यूसेक पानी मिलने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश को करीब 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को करीब 105.28 क्यूसेक पानी मिलने की उम्मीद है।

अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकेगा। खास तौर पर पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

यमुना को कैसे होगा किशाऊ डैम से फायदा?

किशाऊ डैम परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यमुना नदी में पानी का प्रवाह बढ़ाना है। जलाशय में पानी को नियंत्रित तरीके से जमा करने और आवश्यकता के अनुसार छोड़ने से यमुना में अतिरिक्त जल प्रवाह उपलब्ध कराया जा सकेगा।

यमुना के कई हिस्सों में पर्याप्त प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। अतिरिक्त साफ पानी मिलने से नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बेहतर बनाने और यमुना पुनर्जीवन से जुड़े प्रयासों को मदद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि नदी के प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल अतिरिक्त पानी से नहीं होगा और इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और अन्य उपाय भी जरूरी रहेंगे।

सिंचाई से बिजली उत्पादन तक होंगे कई फायदे

किशाऊ को मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट कहे जाने की वजह इसके कई संभावित उपयोग हैं। जलाशय से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के साथ जलविद्युत उत्पादन की योजना भी जुड़ी हुई है। इससे उत्तर भारत के कई राज्यों की जल सुरक्षा मजबूत करने, कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा परियोजना जल प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बड़े जलाशय के जरिए पानी का भंडारण कर अलग-अलग मौसम में जरूरत के मुताबिक इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी पर नजर

छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट अब मंजूरी के अगले चरण की तरफ बढ़ सकता है। परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने मंजूरी के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है।

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि निर्माण शुरू होने और परियोजना पूरी होने की समयसीमा समेत कई महत्वपूर्ण विवरण आगे की सरकारी मंजूरियों और प्रक्रियाओं के बाद स्पष्ट होंगे।

कई वर्षों से लंबित किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों के बीच बनी सहमति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना उत्तर भारत की जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और यमुना में अतिरिक्त जल प्रवाह जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

 

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