अयोध्या में श्रीराम मंदिर को श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा दान में दी गई चांदी को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की चर्चाएं और आरोप सामने आ रहे थे। विशेष रूप से चांदी से निर्मित काकभुशुंडी के कथित रूप से गायब होने की खबरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही थीं। अब इस मामले में नया दावा सामने आया है, जिसके अनुसार चांदी के काकभुशुंडी कहीं गायब नहीं हुए, बल्कि उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ संरक्षित रखा गया है।
कारसेवक पुरम में सुरक्षित हैं चांदी के काकभुशुंडी
सामने आई जानकारी के मुताबिक, चांदी से बने काकभुशुंडी को अयोध्या के कारसेवक पुरम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कक्ष में सुरक्षित रखा गया है। दावा है कि चंपत राय के पूजा स्थल पर काकभुशुंडी की नियमित रूप से विधिवत पूजा-अर्चना भी की जाती है।
इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई चांदी की एक बड़ी माला को भी कारसेवक पुरम परिसर में सुरक्षित और संरक्षित रखा गया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद काकभुशुंडी के गायब होने संबंधी चर्चाओं को निराधार बताया जा रहा है।
सिंधी समाज ने दान की थीं करीब 200 किलो चांदी की ईंटें
जानकारी के अनुसार, सिंधी समाज की ओर से श्रीराम मंदिर के लिए लगभग 200 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंटें दान में दी गई थीं। चांदी की इतनी बड़ी मात्रा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और भंडारण को व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई।
बताया गया है कि बड़ी-बड़ी चांदी की ईंटों को उसी स्वरूप में रखने के बजाय उन्हें तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से छोटे आकार में परिवर्तित कराया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य चांदी की सुरक्षा, पहचान, गिनती और भंडारण को अधिक सुविधाजनक बनाना था।
आधा-आधा किलो के सिल्वर ब्रिक में बदली गई चांदी
दावे के मुताबिक, लगभग 200 किलो चांदी की बड़ी ईंटों को गलवाकर आधा-आधा किलोग्राम वजन के छोटे सिल्वर ब्रिक तैयार कराए गए। छोटे आकार के सिल्वर ब्रिक तैयार होने से उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने और आवश्यकता पड़ने पर उनका सत्यापन करने में आसानी हो सकती है।
चांदी को गलाने और मानक आकार के सिल्वर ब्रिक में परिवर्तित करने के लिए ‘मिंट’ नामक संस्था से तकनीकी सहयोग लिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस पूरे मामले से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और विस्तृत प्रक्रिया सार्वजनिक स्तर पर सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
SBI के लॉकर में सुरक्षित रखे गए सिल्वर ब्रिक
जानकारी में दावा किया गया है कि तैयार किए गए सभी सिल्वर ब्रिक को भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI के सुरक्षित लॉकर में रखा गया है। चांदी की सुरक्षा और पारदर्शी संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बैंक लॉकर का विकल्प चुना गया।
बताया जा रहा है कि चांदी को छोटे ब्रिक में बदलने से उसके वजन, संख्या और भंडारण का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना भी आसान हो गया है। बैंक लॉकर में रखे जाने के कारण चांदी के चोरी होने, क्षतिग्रस्त होने अथवा गायब होने जैसी आशंकाओं को भी कम किया जा सकता है।
सोशल मीडिया की चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश
राम मंदिर को दान में मिली चांदी, चांदी के काकभुशुंडी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। नए दावे के अनुसार, काकभुशुंडी कारसेवक पुरम में सुरक्षित हैं, जबकि चांदी की ईंटों से बनाए गए सिल्वर ब्रिक SBI के लॉकर में रखे गए हैं।
इस जानकारी को चांदी गायब होने संबंधी अफवाहों और आरोपों पर विराम लगाने वाला बताया जा रहा है। हालांकि मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी होने पर दान में मिली चांदी की मात्रा, उसके परिवर्तन और वर्तमान भंडारण को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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