उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार, 6 जुलाई 2026 को बड़ा फैसला लेते हुए शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील और नगर का नाम बदलकर ‘भगवान परशुराम पुरी’ यानी ‘परशुरामपुरी’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब नाम परिवर्तन से जुड़ी आवश्यक प्रशासनिक, राजस्व और आधिकारिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नया नाम सरकारी अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में लागू किया जाएगा।
योगी कैबिनेट की इस बैठक में कुल 28 प्रस्ताव सूचीबद्ध थे। इनमें से 27 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जबकि मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी से जुड़ा एक प्रस्ताव फिलहाल स्थगित रखा गया। बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन, स्टार्टअप नीति-2026 और डेटा सेंटर नीति-2026 जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
जलालाबाद का नया नाम ‘भगवान परशुराम पुरी’
शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलने की मांग लंबे समय से चल रही थी। इस क्षेत्र को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है और यहां उनसे जुड़ा एक प्राचीन धार्मिक स्थल भी है।
योगी सरकार ने इसी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आधार बनाते हुए जलालाबाद का नाम बदलकर ‘भगवान परशुराम पुरी’ करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी दी है। कुछ आधिकारिक और मीडिया संदर्भों में नए नाम को संक्षेप में ‘परशुरामपुरी’ भी लिखा जा रहा है।
सरकार के इस फैसले के बाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके तहत नए नाम को विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों में शामिल किया जाएगा।
भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है जलालाबाद
जलालाबाद क्षेत्र को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जन्मभूमि माना जाता है। क्षेत्र में भगवान परशुराम से जुड़ा प्राचीन मंदिर और कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में भी इस क्षेत्र को भगवान परशुराम की जन्मभूमि के रूप में मान्यता देने की दिशा में कदम उठाया था। धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए यहां विकास कार्यों की योजना भी बनाई गई।
योगी सरकार का नया फैसला अब इस क्षेत्र की प्रशासनिक पहचान को उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2018 से चल रही थी नाम बदलने की प्रक्रिया
जलालाबाद का नाम बदलने की प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार, शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और सितंबर 2023 में अपनी बोर्ड बैठकों में नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया। राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार के पास भेजा और केंद्र की ओर से 20 अगस्त 2025 को प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी।
अब 6 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के साथ राज्य स्तर पर इस प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है।
CM योगी की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक
उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ के 5 कालिदास मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास पर हुई।
बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत योगी सरकार के कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शामिल हुए। इस दौरान प्रशासन, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, उच्च शिक्षा और पशुपालन समेत विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
28 प्रस्ताव एजेंडे में, 27 को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक को लेकर शुरुआती जानकारी में प्रस्तावों की संख्या 28 बताई गई थी। बाद में सामने आई विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से 27 प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी मिली। मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी से संबंधित प्रस्ताव को फिलहाल मंजूरी नहीं मिली और उसे स्थगित रखा गया। इस कारण मंजूर प्रस्तावों की अंतिम संख्या 27 रही।
इन फैसलों में जलालाबाद का नाम बदलने के साथ उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन, स्टार्टअप नीति-2026, डेटा सेंटर नीति-2026, तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और पशुधन बीमा योजना से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल रहे।
‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ को कैबिनेट की मंजूरी
योगी सरकार ने प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। बैठक के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से जुड़ी जानकारी में बताया गया कि स्टार्टअप मिशन का उद्देश्य प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को अधिक संगठित और मजबूत बनाना है।
सरकार का फोकस ऐसे युवाओं को आगे बढ़ाने पर है, जो नई तकनीक, नवाचार और नए बिजनेस मॉडल के जरिए रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को हरी झंडी
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। नई नीति का उद्देश्य राज्य को देश के प्रमुख स्टार्टअप और इनोवेशन हब के रूप में विकसित करना है।
नई नीति की तैयारी के दौरान सरकार ने स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग और नए बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया था। इसके अलावा स्टार्टअप्स को उच्च गुणवत्ता वाले एक्सेलेरेटर प्रोग्राम, निवेशकों, उद्योग जगत और शोध संस्थानों से जोड़ने की दिशा में भी प्रावधान तैयार किए गए थे।
सरकार का मानना है कि नई नीति से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा उद्यमियों को भी अपने विचारों को सफल व्यवसाय में बदलने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने पर फोकस
योगी सरकार की नई स्टार्टअप रणनीति का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनाना है। उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल और औद्योगिक ढांचे तथा विशाल उपभोक्ता बाजार को स्टार्टअप विकास के लिए बड़ी ताकत माना जा रहा है।
नई नीति में तकनीक आधारित स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक, इनोवेशन और नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विशेष फोकस किए जाने की तैयारी पहले से चल रही थी।
डेटा सेंटर नीति-2026 को भी मंजूरी
योगी कैबिनेट ने प्रदेश की डेटा सेंटर नीति-2026 को भी स्वीकृति दी है। सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। उत्तर प्रदेश सरकार पहले से लागू डेटा सेंटर नीति-2021 को अधिक आकर्षक और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम कर रही थी।
नई नीति की तैयारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर, ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा सेंटर तथा एज डेटा सेंटर को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना सामने आई थी।
AI और ग्रीन डेटा सेंटर पर विशेष फोकस
नई डेटा सेंटर नीति के केंद्र में भविष्य की तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रखा गया है। नीति की तैयारी के दौरान AI आधारित डेटा सेंटरों को सामान्य डेटा सेंटरों की तुलना में अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके साथ ही पर्यावरण अनुकूल और ग्रीन सर्टिफिकेशन हासिल करने वाले डेटा सेंटरों के लिए अतिरिक्त वित्तीय लाभ की योजना भी तैयार की गई थी।
सरकार का लक्ष्य प्रदेश में डेटा सेंटर क्षमता को तेजी से बढ़ाना और उत्तर प्रदेश को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा डिजिटल सेवाओं के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
2030 तक डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना देख रही है। नई नीति की तैयारी के दौरान राज्य की डेटा सेंटर क्षमता को 644 मेगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 2 गीगावाट करने का लक्ष्य सामने रखा गया था।
डेटा सेंटर सेक्टर के विस्तार से आईटी, क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा, AI, नेटवर्किंग और अन्य हाई-टेक क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
निवेश और रोजगार को गति देने की रणनीति
स्टार्टअप नीति और डेटा सेंटर नीति को एक साथ मंजूरी देना योगी सरकार की डिजिटल अर्थव्यवस्था को तेज करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
एक तरफ स्टार्टअप नीति युवाओं, इनोवेटर्स और नए उद्यमियों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है, जबकि दूसरी तरफ डेटा सेंटर नीति बड़े निवेश और आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का रास्ता खोलती है।
सरकार को उम्मीद है कि इन दोनों नीतियों से उत्तर प्रदेश में नए निवेश आएंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश की डिजिटल तथा औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
तीन नए निजी विश्वविद्यालयों को भी मंजूरी
योगी कैबिनेट ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण फैसले किए।
रिपोर्टों के अनुसार, कैबिनेट ने:
- कानपुर के बिल्हौर में महर्षि योगी इंटरनेशनल कृषि विश्वविद्यालय
- फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय
- गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय
की स्थापना के प्रस्तावों को मंजूरी दी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकल्पों का विस्तार करना और युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।
पशुपालकों के लिए बीमा योजना को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में पशुपालकों और किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया। मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिली। यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों, पशुपालकों और डेयरी फार्म संचालकों को पशुओं की बीमारी, अपंगता या मृत्यु जैसी स्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
धार्मिक पहचान से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक बड़े फैसले
योगी कैबिनेट की 6 जुलाई की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रही।
एक तरफ सरकार ने जलालाबाद का नाम बदलकर भगवान परशुराम की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का फैसला लिया, वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप और डेटा सेंटर जैसी भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ी नीतियों को भी मंजूरी दी।
इस तरह कैबिनेट बैठक में सांस्कृतिक पहचान, निवेश, नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और किसान-पशुपालक कल्याण से जुड़े कई बड़े फैसले सामने आए।
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