संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही को सार्थक, सकारात्मक और राष्ट्रहित पर केंद्रित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश ने विकास की गति पकड़ ली है और संसद में होने वाली रचनात्मक चर्चा इस गति को नई ऊर्जा दे सकती है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान प्रत्येक सांसद की आवाज को अवसर और हर विचार को सम्मान मिलेगा।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की सफलता से की संबोधन की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में मिली हालिया सफलता का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस और उसके युवा वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि भारत के एक युवा स्टार्टअप ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में निजी क्षेत्र ने इस प्रकार की अंतरिक्ष क्षमता विकसित की है। उन्होंने इसे भारत के युवाओं, स्टार्टअप इकोसिस्टम और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।
स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल उड़ान को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रधानमंत्री इससे पहले भी कंपनी की युवा टीम की प्रशंसा करते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के फैसले को सही साबित करने वाली उपलब्धि बता चुके हैं।
‘28 साल के नौजवानों की बात कर रहा हूं, 56 साल के नहीं’
स्काईरूट की युवा टीम का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसमें काम करने वाले युवाओं की औसत आयु करीब 28 वर्ष है। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के एक प्रमुख नेता का नाम लिए बिना राजनीतिक तंज कसते हुए कहा:
“मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं। मैं 28 साल की औसत आयु वाले उन नौजवानों की बात कर रहा हूं, जिन्होंने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है।”
प्रधानमंत्री के इस बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया।
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की विकास दर मजबूत
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की आपूर्ति तथा कीमतों से जुड़ी कई बाधाएं सामने आई हैं।
पीएम मोदी के अनुसार, इन वैश्विक संकटों और चुनौतियों के बावजूद भारत 7.7 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक क्षमता और मजबूती का परिचायक बताया। पश्चिम एशिया के संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर प्रधानमंत्री पहले भी चिंता व्यक्त कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि देश ने जब विकास की गति पकड़ ली है, तब संसद का सकारात्मक वातावरण इस रफ्तार में नई ऊर्जा भर सकता है।
अनुभवी सांसदों के ज्ञान का देश को मिले लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद में बड़ी संख्या में अनुभवी सांसद मौजूद हैं और देश को उनके लंबे राजनीतिक एवं संसदीय अनुभव की आवश्यकता है। उन्होंने सभी सदस्यों से मिल-जुलकर काम करने और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा करने का आग्रह किया।
पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा चाहते हैं कि भारत निरंतर आगे बढ़े। राष्ट्र के प्रति समर्पित और देशभक्ति से भरी आवाजों को सदन में उचित मंच मिलना चाहिए।
‘तथ्य और तर्क हों तो तूफान की जरूरत नहीं’
प्रधानमंत्री ने विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों से शांतिपूर्ण एवं तथ्यात्मक चर्चा की अपील करते हुए कहा:
“जहां तथ्य होते हैं और तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती। अगर तर्क मजबूत हैं और तथ्य मजबूत हैं, तो शांत चित्त से भी अपनी आवाज बुलंद की जा सकती है।”
उन्होंने आशा व्यक्त की कि मॉनसून सत्र के दौरान तर्क और तथ्यों के आधार पर चर्चा होगी, प्रत्येक आवाज को बोलने का अवसर मिलेगा और सभी विचारों का सम्मान किया जाएगा।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel